उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट:धीरज यादव
दुबहर, बलिया:-- क्षेत्र के शिवपुर दीयर नई बस्ती बेयासी में चल रहे भव्य श्री शतचंडी महायज्ञ' के पांचवें दिन गुरुवार को यज्ञ मंडप से गूंजती वैदिक ऋचाओं और सायंकाल में हुई संगीतमय कथा को श्रद्धालुओं ने रसपान किया। यज्ञाचार्य पंडित रंजीत तिवारी के कुशल नेतृत्व में विद्वान ब्राह्मणों ने दुर्गासप्तशती का सस्वर पाठ किया और शुक्लयजुर्वेद के दिव्य मंत्रों के साथ कुंड में विशेष आहुतियां डालीं गई। यज्ञ की पवित्र अग्नि और धूप-हवन की सुगंध से पूरा क्षेत्र दैवीय ऊर्जा से सराबोर हो उठा।
यज्ञाचार्य ने बताया कि यज्ञ से न केवल आत्मिक शुद्धि होती है, बल्कि पर्यावरण का भी कल्याण होता है। वहीं शायं काल में नैमिषारण्य से पधारे भागवत मर्मज्ञ डॉ.ओंकार नारायण भारद्वाज ने व्यासपीठ से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान राम का जीवन किसी एक युग के लिए नहीं, बल्कि अनंत काल के लिए आदर्श जीवन का सर्वोच्च मानक है। एक पुत्र, भाई, पति और राजा के रूप में उनका आचरण हमें सिखाता है कि विकट से विकट परिस्थितियों में भी अपनी मर्यादा और धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। आज के समाज को यदि सुखी और समृद्ध बनाना है, तो राम के आदर्शों को केवल पूजना नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारना होगा।
कथा व्यास ने आगे श्रीमद्भागवत प्रसंग को बढ़ाते हुए भगवान श्री कृष्ण के दिव्य जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने गीता के उपदेशों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है और अधर्म का बोलबाला बढ़ता है, तब-तब प्रभु दुष्टों का संहार करने और धर्म की स्थापना के लिए किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं। इस दौरान जैसे ही बालकृष्ण की मनमोहक झांकी सजाई गई, पूरा पंडाल 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठा। सोहर और पारंपरिक बधाई गीतों पर श्रद्धालु खूब झूमें।
कथा के दौरान डॉ.भारद्वाज ने कहा कि कंस का वध यह संदेश देता है कि सत्ता, धन या बल का अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है। श्रवण कुमार और भगवान राम के प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने युवाओं को अपने माता-पिता और गुरुजनों के सम्मान की सीख दी। इस पावन अवसर पर मुख्य अज्ञाचार्य श्रीप्रकाश मिश्र सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया।

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