उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट:धीरज यादव
दुबहर, बलिया:--योग ब्रह्मांड की असीम अवधारणा एवं अनंत अति आध्यात्मिक तथा शारीरिक सर्व सुलभ प्रक्रिया है। योग को सिर्फ व्यायाम तक सीमित करना उसे लघुता प्रदान करना है। उक्त बातें गंगा मुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान के प्रणेता रमाशंकर तिवारी ने मीडिया सेंटर अखार पर रविवार को योग दिवस के अवसर पर एक साक्षात्कार में कहीं।
उन्होंने कहा कि योग प्रकृति प्रदत्त, वह क्रिया है जो ब्रह्मांड की गति एवं नियति को प्रभावित तो करती ही है, साथ ही शरीर को अंतर्निहित ऊर्जा को प्रकटकर उसे निरोग रखने की विधि का भी साकार करता है। ब्रह्मांड के जितने ग्रह, नक्षत्र, तारे हैं वे आपस में योग न करें तो न तो प्रकृति का अनुभव होगा न ही परमात्मा का। योग अनमोल अवधारणा है, जिसका आंकलन अनंत एवं असीमित है।
*इसी क्रम में* सामाजिक चिंतक बब्बन विद्यार्थी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि- योग प्राचीन भारतीय परंपरा एवं संस्कृति की अमूल्य देन ही नहीं बल्कि जीवन को सुदृढ़ बनाने की अद्भुत कला है। योग के अभ्यास से शरीर और मस्तिष्क के बीच एक संबंध बन जाता है, जिससे मस्तिष्क अनुशासित रहता है। यह व्यायाम का ही एक प्रकार है, जो शरीर और मन को नियंत्रित करके जीवन को बेहतर बनाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तनाव के इलाज की कुंजी योग में निहित है।

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