इनपुट:सोशल मीडिया
नई दिल्ली:--जम्मू कश्मीर के पहल गांव में 23 अप्रैल को जो आतंकवादियों ने उसे दिल्ली से वहां गए टूरिस्ट को बच्चा हो या बूढ़ा हो या औरत हो किसी को भी नहीं छोड़ा सबको एक-47 से गोली मार दी लेकिन अबकी बारी जो उन्होंने धर्म के नाम पर गोलियां मारी है पहले कभी ऐसा नहीं होता था इस बार ऐसा क्यों की उनका धन पूछ के और कलमा पड़वा करके गोली मारते थे जिसके साथ लोगों को गोली मारी जिनमें से 26 लोगों की मृत्यु हो गई घायलों को नजदीकी अस्पताल में इलाज चल रहा है और जो लोग वह मंजर आंखों से देखें और अपनी जान बचाकर के वहां से भेज वह लोग कहते थे की पहले मजा पूछते थे और फिर कलम पदवाते थे जब कलमा पढ़ना नहीं आता था उसे गोली मार देते थे इसके पीछे पाकिस्तान आतंकवादी तो है ही लेकिन कुछ और ऐसे लोग हैं जो छिपे हुए हैं जिनका नाम छुपा कर रखा गया है भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि हम न आतंकवादियों को बल्कि परदे के पीछे बैठकर हिंदुस्तान की सरजमीं पर नापाक साजिश रचने वालों तक पहुंचेंगे।और जो जो इस घिनौनी साजिश में उनके साथ दिया होगा उन्हें भी आतंकवादियों की तरह कड़ी से कड़ी सजा देंगे और वह ज्यादा दिन तक नहीं बच पाएंगे चाहे जहां भी छप जाए हम उन्हें ढूंढ निकालेंगे।
बंगाली डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य की जान बच सकी।
जम्मू कश्मीर पहलगाम :---जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 घायल हो गए। आतंकवादियों ने पहलगाम घूमने आए पर्यटकों से उनके धर्म पूछकर गोलियां बरसाईं।कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्हें कलमा पढ़ने के लिए भी कहा गया, जिससे उनके धर्म की पहचान हो सके। जिन्होंने कलमा पढ़ा, उन्हें आतंकियों ने छोड़ दिया। इसी तरह असम के एक हिंदू प्रोफेसर को भी आतंकियों ने गोली नहीं मारी, क्योंकि वह कलमा पढ़ सकते थे। इसके चलते असम यूनिवर्सिटी में बंगाली डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य की जान बच सकी।

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