उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट: अमीत कुमार गुप्ता
बलिया उत्तरप्रदेश:---पान एक औषधीय गुणों वाला पौधा हैं, इसके पत्तों में एंटीसेप्टिक, एंटी-फंगल एवं एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। पान के पत्ते सांस की समस्याओं को कम करते हैं, जोड़ों के दर्द से राहत देते हैं, इसके अलावा पान के पत्तों का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ में भी किया जाता हैं।
करने
🔷️ गमले में पान की बेल उगाने की विधि :--
✅️ सही मौसम और समय :
पान की बेल लगाने के लिए वसंत और मानसून सबसे सही समय होता हैं। इस समय नमी और गर्मी का संतुलन बेल की वृद्धि के लिए उपर्युक्त हैं।
✅ ️गमले का चयन :
कम से कम 12 से 15 इंच गहरा और चौड़ा मिट्टी या प्लास्टिक का गमला लें। गमले में जल-निकासी के लिए छेद होने चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।
✅ ️️मिट्टी की तैयारी :
पान की बेल के लिए भुरभुरी, जल-निकासी वाली और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर मिट्टी सबसे अच्छी होती हैं। इसकी मिट्टी बनाने के लिए 50% मिट्टी + 30% गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट + 20% रेत का इस्तेमाल करें।
✅️ पान की बेल कैसे लगाए :
पान की बेल को कटिंग या तैयार पौधे के रूप में लगाया जा सकता हैं। कटिंग में 4-5 गांठें होनी चाहिए और इसे मिट्टी में 2-3 इंच गहराई में रोपें। शुरूआत में बेल को छायादार जगह पर रखें और हर दिन थोड़ा-थोड़ा पानी दें।
🔷️ पान के पौधे की देखभाल का तरीका :--
1) पौधे को छायादार या अप्रत्यक्ष धूप में रखें, सीधी तेज धूप से बचाए।
2) इसकी मिट्टी को सूखने न दें, लेकिन ओवर-वाटरिंग करने से भी बचे।
3) बेल को चढ़ाने के लिए लकड़ी की छड़ी या जाली का इस्तेमाल करें।
4) ️पत्तियों पर हर 15 दिन में पानी का छिड़काव करें ताकि धूल हट जाये और पत्तियां हरी-भरी दिखें।
5) ️हर 30 से 35 दिन में गमले की मिट्टी की गुड़ाई करके 2 मुट्ठी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें।
6) ️महीने में एक बार नीम की खली का घोल देने से कीट-फंगस नहीं लगते।
7) ️अगर पत्तियां पीली पड़ने लगें तो थोड़ा सा जैविक नाइट्रोजन खाद का इस्तेमाल करें।
8) सर्दियों में बेल की वृद्धि धीमी हो जाती हैं, उस समय इसे घर के अंदर रखें, तेज हवा और ठंड से बचाएं।
9) ️हर 1-2 साल में गमला बदल दें ताकि जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
10) घना करने के लिए समय-समय पर इसकी प्रूनिंग करें।

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