उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट: हिमांशु शेखर
बलिया उत्तरप्रदेश:---नीलकण्ठ महादेव का मंगलकारी एवं शांत मूर्त के अंतर्गत एक सौम्य स्वरूप माना जाता है, इस सौम्य स्वरूप के विषय में श्रीमद्भागवत के आठवें अध्याय में एक कथा आई है, जिसके अनुसार समुद्र मंथन के समय समुद्र से ‘हलाहल’ नामक विष निकला, उस समय सभी देवों की प्रार्थना तथा पार्वती जी के अनुमोदन से शिवजी ने हलाहल का पान कर लिया और हलाहल को उन्होंने कण्ठ में ही रोक लिया, जिससे उनका कण्ठ नीला पड़ गया और उन्हें नीलकण्ठ कहा जाने लगा।
श्रीमद्भागवत के चौथे अध्याय में–‘तत्पहेमनिकायाभं शितिकण्ठं त्रिलोचनम्’ कहकर भगवान शिव के नीलकण्ठ वाले सौम्य रूप का वर्णन किया गया है।
वर्तमान समय में नीलकण्ठ नामक पक्षी को भगवान शिव (नीलकण्ठ) का प्रतीक माना जाता है, उड़ते हुए नीलकण्ठ पक्षी का दर्शन करना सौभाग्य का सूचक माना जाता है। ‘खगोपनिषद्’ के ग्यारहवें अध्याय के अनुसार नीलकण्ठ साक्षात् शिव का स्वरूप है तथा वह शुभ-अशुभ का द्योतक भी है।
‘खगोपनिषद्’ के अनुसार अगर कोई सम्मुख नीलकण्ठ को उड़ते देखती है तो, उसकी सौभाग्यशीलता की आयु पांच वर्ष और अधिक बढ़ जाती है। अपने बाएं उडऩे पर प्रिय मिलन, दाएं उड़ते देखने पर पति समागम तथा पीठ पीछे नीलकण्ठ के उड़ते देखने पर पुराने प्रेमी से मिलने का योग होता है।
नीलकण्ठ अगर भूमि पर बैठा दिखाई दे तो, उस स्त्री में उदर सम्बन्धी विकार या रोग पनपने की संभावना होती है। अगर नीलकण्ठ किसी वृक्ष की हरी डाली पर बैठा दिखाई दे तो, यौन सुख, सूखे वृक्ष की डाली पर बैठा दिखाई दे तो यौन व्याधि या दापत्य कलह, जलाशय के किनारे बैठा दिखाई दे तो, पर-पुरुष गमन की संभावना बढ़ जाती है। नीलकण्ठ अगर किसी ब्याहता स्त्री सूख रहे, अधोवस्त्र (पेटीकोट, ब्लाऊज, ब्रा) आदि पर आकर बैठ जाए तो, उसे पुत्ररत्न की प्राप्ति अवश्य ही होती है।
कुंआरी कन्या के अधोव पर अगर नीलकण्ठ आकर बैठ जाता है तो, यह इस बात का सूचक होता है कि, उस कन्या का वैवाहिक जीवन आजीवन सुखमय एवं आनंदमय व्यतीत होगा।
अगर कोई रजस्वला कुंआरी कन्या नीलकण्ठ पक्षी को अपनी दाईं ओर उड़ते देखती है तो उसका विवाह शीघ्र ही होने का भाव दर्शाता है। इस कन्या के बाईं ओर नीलकण्ठ के उडऩे पर परभोग्या, सम्मुख उडऩे पर प्रियदर्शन तथा पीठ पीछे उडऩे पर विश्वासघात का योग बनता है।
अविवाहित कन्या के सम्मुख अगर नीलकण्ठ भूमि पर बैठा दिखाई दे तो, यह इस बात का सूचक है कि, उस कन्या की मनोकामना शीघ्र पूरी होने वाली है। अगर शुष्क काष्ठ पर नीलकण्ठ बैठा दिखाई दे तो, कौमार्यभंग, जलाशय पर बैठा दिखाई दे तो, प्रिय सहेली या नजदीकी रिश्तेदार से मिलन का योग होता है।
नीलकण्ठ का जूठा किया हुआ, फल खाने से मनवांछित लाभ, सौभाग्यवृद्धि एवं सुखमय वैवाहिक जीवन का योग बनता है।
पुरुष द्वारा सम्मुख नीलकण्ठ-दर्शन शुभकारी होता है। उड़ता हुआ नीलकण्ठ अगर दाएं भाग में दिखाई दे तो, विजय-पराक्रम, बाईं ओर का दर्शन शत्रुनाश, पृष्ठभाग का दर्शन हानिप्रद माना जाता है। भूमि पर बैठा नीलकण्ठ स्त्री शोक, शुष्ककाष्ठ पर बैठा नीलकण्ठ पुत्र शोक तथा जलाशय पर बैठा नीलकण्ठ-दर्शन व्यापार एवं संतति लाभ का सूचक होता है।
अगर नीलकण्ठ अविवाहित युवक के माथे पर से उड़ता हुआ निकल जाए तो, यह अत्यंत शुभकारी माना जाता है। कामनापूर्ति, आर्थिक स्थिति में दृढ़ता तथा अतिशीघ्र वैवाहिक बंधन में बंधने की भावी सूचना का द्योतक होता है। अधोवस्त्र (जंघिया, लंगोटा, बनियान) आदि पर अगर नीलकण्ठ आकर बैठ जाए तो, यह इस बात का सूचक होता है कि, उसे स्त्री-सुख प्राप्त होना है। सावन माह में अगर किसी भी स्थिति में नीलकण्ठ का दर्शन हो जाए तो, वह सुख-सौभाग्य समृद्धिवर्धक ही होता है।

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