उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट : हिमांशु शेखर
बलिया उत्तरप्रदेश:-- संघनन के विभिन्न रूपों में बादल सबसे महत्वपूर्ण है। वास्तव में बादल 'जल एवं हिम सीकरों का ही बड़े स्तर समूहन' का प्रतिफल होता है, जो कोहरा की अपेक्षा ऊंचाई पर निर्मित होता है। बादलों का निर्माण अस्थिर वायु द्वारा होता है। इस प्रकार पृथ्वी की सतह से विभिन्न ऊंचाईयों पर वायुमंडल में जल वाष्प के संघनन के फलस्वरूप निर्मित 'हिमकणों' या 'जल सीकरों' को ही 'बादल' अथवा 'मेघ' कहा जाता है।
बादलों के कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि यदि चाय के एक चम्मच को इन सूक्ष्म कणों से भरा जाय तो लगभग 5 अरब सूक्ष्म कणों की आवश्यकता पड़ेगी।
बादल वायुमंडल में भिन्न - भिन्न ऊंचाईयों पर स्थित होते हैं। उष्ण कटिबंधों में बादलों की ऊंचाई अधिक होती है, जब कि शीत कटिबंधों में ऊंचाई कम होती है। उष्ण कटिबंधों में निम्न बादलों की ऊंचाई 1,000 फीट, मध्यम स्तर के बादलों की ऊंचाई 25,000 फीट एवं उच्च स्तर के बादलों की ऊंचाई 35,000 फीट तक होती है। शीतोष्ण कटिबंधों में निम्न स्तर के बादलों की ऊंचाई 8,000 फीट, मध्यम स्तर के बादलों की ऊंचाई 15,000 फीट एवं उच्च स्तर के बादलों की ऊंचाई 15,000 फीट से अधिक होती है।
विभिन्न आकार - प्रकार के होते हैं बादल: -
प्राचीन भारतीय ग्रंथों सहित आधुनिक मौसम एवं जलवायु वेत्ताओं द्वारा बादलों का विभाजन किया गया है। श्रीमद् भागवत गीता, अथर्ववेद एवं कालिदास के 'मेघदूत' में विभिन्न प्रकार के बादलों का वर्णन मिलता है , जिनमें आवर्तक, समस्तरीय, पुष्कर एवं पर्जन्य नामक बादलों के आकार, प्रकार एवं उनकी विशेषताओं का वर्णन मिलता है।
आधुनिक काल में बादलों को 10 प्रकार में विभक्त किया गया है,जो इस प्रकार है-
1. पक्षाभ बादल
2. पक्षाभ स्तरी
3. पक्षाभ कपासी
4. स्तरी मध्य
5. कपासी मध्य
6. स्तरी कपासी
7. स्तरी बादल
8. वर्षा स्तरी
9. कपासी
10. कपासी वर्षा
वैसे बादलों के अवयन , बनावट, आधार की ऊंचाई, उर्ध्व विस्तार तथा वृद्धि एवं ह्रास के आधार पर बादलों को निम्नांकित रूपों में विभक्त किया गया है-
बादलों का मौसम एवं जलवायु के बदलाव में भी विशेष भूमिका होती है। बादल अपनी विशेषताओं के आधार पर वायुमंडल के तापमान में परिवर्तन लाते हैं। बादलों के आकार, प्रकार, संघनन, जल ग्रहण की क्षमता आदि के आधार पर वर्षा प्रदान करने की क्षमता भी अलग - अलग होती है। कुछ बादल वर्षा प्रदान करते हैं, जबकि कुछ बादलों से वर्षा नहीं भी होती है। बादलों की विशेषताएं भी अलग - अलग होती हैं। इन विशेषताओं का प्रभाव मौसम पर पड़ता है।

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