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    शाही स्नान को क्यों किया गया अमृत स्नान? जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर ने बताई वजह

    . प्रयागराज में इस समय महाकुंभ चल रहा है. बड़ी संख्या में श्रृद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. ऐसे में 14 जनवरी को महाकुंभ का पहला अमृत स्नान संपन्न हो चुका है, यह स्नान मकर संक्रांति के दिन हुआ. जिसमें परंपरा अनुसार, सभी 13 अखाड़ों के साधु-संतों, आचार्य, महामंडलेश्वर, नागा साधुओं, अघोरियों और महिला साधुओं ने स्नान किया. इसके बाद आम जनता है ने भी संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाई. लेकिन क्या आपको पता है कि प्रयागराज महाकुंभ से पहले अमृत स्नान को शाही स्नान कहा जाता था. लेकिन इस बार इसे अमृत स्नान कहा गया. क्या आपको पता है इसके नाम बदलने के पीछे क्या है कारण? तो आइए जानते हैं.

    144 साल के बाद बना संयोग
    पंडित रमाकांति मिश्रा ने बताया कि, इस बार का महाकुंभ बहुत ही शुभ संयोगों में आया है. क्योंकि यह अद्भुत संयोग 144 सालों के बाद बना था और इसलिए यहां संगम में डुबकी लगाने के लिए साधु-संतों सहित आम जनता में भी खासा उत्साह देखने को मिला.






     

















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