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    इरादतन हत्या के प्रयास के मामले में दोषी करार देते हुए 03 नफर अभियुक्तगण प्रत्येक को 05 वर्ष सश्रम कारावास व 10000-10000/- रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित

    उत्तर प्रदेश जनपद बलिया
    इनपुट: हिमांशु शेखर 


    बलिया उत्तरप्रदेश:---पुलिस महानिदेशक उ0प्र0, लखनऊ द्वारा चलाये जा रहे अभियान “OPERATION CONVICTION” के अन्तर्गत पुलिस अधीक्षक बलिया श्री ओमवीर सिंह के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल व अभियोजन शाखा के प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप  मा0 न्यायालय जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलिया द्वारा गैर इरादतन हत्या के प्रयास के मामले में दोषी करार देते हुए 03 नफर अभियुक्तगण प्रत्येक को 05 वर्ष सश्रम कारावास व 10000-10000/- रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया ।

    दिनांक- 24.03.2025 को बलिया पुलिस के मॉनिटरिंग सेल व अभियोजन शाखा के प्रभावी पैरवी से थाना नगरा पर पंजीकृत मु0अ0सं0- 166/2010  धारा- 308/34, 325/34, 323/34, 504, 427 भादवि से सम्बन्धित प्रकरण में आरोपित 03 नफर अभियुक्तगण 1. परशुराम दुबे पुत्र बैजनाथ दुबे, 2. मनीष तिवारी पुत्र राम प्रवेश तिवारी निवासीगण सोनाड़ी थाना नगरा जनपद बलिया 3. बन्टू उर्फ अवनीश तिवारी पुत्र लाल बहादुर उर्फ झारखण्डे तिवारी निवासी नवानगर चाड़ी थाना सिकन्दरपुर जनपद बलिया* को मा0 न्यायालय सत्र न्यायाधीश बलिया द्वारा-धारा 308/34 भादवि में दोषसिद्ध पाते हुये अभियुक्तगण प्रत्येक को 05 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5000-5000/- रू0 के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया । अर्थदण्ड न अदा करने पर अभियुक्तगण प्रत्येक को 06 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना पड़ेगा।

    धारा 325/34 भादवि में दोषसिद्ध पाते हुये अभियुक्तगण प्रत्येक को 04 वर्ष सश्रम कारावास एवं 4000-4000/- रू0 के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया । अर्थदण्ड न अदा करने पर अभियुक्तों को 03 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना पड़ेगा।

    धारा 323/34 भादवि में दोषसिद्ध पाते हुये अभियुक्तगण प्रत्येक को 06 माह सश्रम कारावास एवं 1000-1000/- रू0 के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया । अर्थदण्ड न अदा करने पर अभियुक्तों को 01 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना पड़ेगा ।

    धारा 504 भादवि में दोषसिद्ध पाते हुये अभियुक्तगण प्रत्येक को 06 माह सश्रम से दण्डित किया गया।

    धारा 427 भादवि में दोषसिद्ध पाते हुये अभियुक्तगण प्रत्येक को 06 माह सश्रम से दण्डित किया गया।

    अभियुक्तगण द्वारा दौरान विवेचना व विचारण जेल में बितायी गयी अवधि अधिरोपित कारावास की सजा में समायोजित की जायेगी एवं सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।


    अभियोजन अधिकारी- DGC श्री संजीव कुमार सिंह

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