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    13 साल का प्रतीक जब मौत के करीब था, तब सिंघम सिद्धार्थ सिंह ने लिखा 12 घंटे में जिंदगी का नया अध्याय



    उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया 
    इनपुट:सोशल मीडिया 


    कौशाम्बी :---रात के ठीक 12 बजे का वक़्त था। सैनी कोतवाली के पहाड़पुर कोदन गांव में सब सो रहे थे, पर तीन साये जाग रहे थे—बदमाश ! एक मासूम प्रतीक अपने बाबा के पास बरामदे में चैन से सोया था। सपनों में शायद स्कूल, खेल और मां की गोदी रही होगी। लेकिन हकीकत में कोई उसे जिंदगी से खींचकर मौत की तरफ ले जा रहा था। सिर्फ 5 मिनट में सबकुछ बदल गया। बाइक की तेज़ आवाज़... चीखते दरवाज़े... और फिर गहरा सन्नाटा। 13 साल का प्रतीक अगवा हो चुका था।

    पर कहानी यहीं खत्म नहीं होती... क्योंकि उस रात सिर्फ बदमाश ही नहीं जाग रहे थे—कौशाम्बी का सिस्टम भी जागा। कौशाम्बी एसपी बृजेश श्रीवास्तव, जिनकी एक कॉल से अपराधियों की रातें कांपती हैं, तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने आदेश नहीं दिया—उन्होंने भरोसा दिया। और उस भरोसे का नाम था: सिद्धार्थ सिंह तीन-तीन अहम जिम्मेदारियों का भार कंधे पर उठाए ये अफसर सिर्फ वर्दी में नहीं थे, मिशन में थे। 12 घंटे का ऑपरेशन था—पर हर मिनट में एक मां की साँस रुकी हुई थी। हर सेकंड एक पिता की आंखें रो रही थीं। सिद्धार्थ सिंह ने मोबाइल सर्विलांस की हर बारीकी जोड़ी। 

    हर नहर, हर लिंक रोड, हर टॉवर लोकेशन को पलटा। और फिर मिली एक कार—CHEVROLET BEAT, पीछा हुआ, घेराबंदी हुई, और दरगाह के पास मुठभेड़।तीन गोलियां चलीं—तीनों बदमाश ज़मीन पर गिरे। और फिर पुलिस की गोद में मिला प्रतीक—जिंदा, डरा हुआ, लेकिन सलामत।बदमाशों ने कहा, “हमने सोचा था 25 लाख फिरौती मिल जाएगी, पुलिस से बच निकलेंगे...” पर वो नहीं जानते थे कि जहां कौशाम्बी जिले के एसपी बृजेश श्रीवास्तव व एसओजी प्रभारी सिद्धार्थ सिंह जैसे अफसर हों, वहां फिरौती नहीं इंसाफ मिलता है। पूरा जिला डरा—पर फिर मुस्कराया। पूरे यूपी ने सराहा—और ADG भानु भास्कर, IG प्रयागराज प्रेम गौतम, और SP कौशाम्बी बृजेश श्रीवास्तव तीनों अधिकारियों ने खुलकर इस टीम को नगद पुरस्कार के साथ सलामी दी।
    *धीरज पाठक*

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