केरल
इनपुट: सोशल मीडिया
केरल :----केरल कैथोलिक चर्च द्वारा संचालित दैनिक "दीपिका" ने सूबे के सांसदों को चेतावनी दी, कि अगर आप सब वक़्फ़ कानून संशोधन विधेयक का समर्थन करने में विफल रहते हैं, तो “भविष्य की पीढ़ियाँ आपको जवाबदेह ठहराएंगी ”। केरल में चर्च के आधिकारिक मुखपत्र दीपिका में मंगलवार (1 अप्रैल, 2025) को प्रकाशित अपने संपादकीय में, कांग्रेस और सीपीआई (एम) की आलोचना करते हुए लिखा, कि ये पार्टियाँ शायद मानती हैं कि कुछ समुदायों के वोट पक्के हैं, जबकि अन्य को समय-समय पर खुश करने की ज़रूरत है।
संपादकीय में चेतावनी दी गई है, "जो भी मामला हो, सिर्फ़ वक्फ के जूते में फिट होने के लिए धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों को कम न करें।" संपादकीय ने, साथ ही, भाजपा से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया कि विधेयक में वक्फ द्वारा अधिग्रहित भूमि को उनके सही मालिकों को वापस करने के प्रावधान शामिल हों।
लेकिन, संशोधन का विरोध करने वालों का तर्क है कि अगर विधेयक पारित भी हो जाता है, तो भी मुनम्बम के लोगों को न्याय नहीं मिलेगा। भारतीय संघ मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद हारिस बीरन द्वारा विधेयक पारित होने पर इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के निर्णय को स्वीकार करते हुए, लेख ने यह भी याद दिलाने का प्रयास किया कि मुनम्बम के लोग भी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।
केरल के एर्नाकुलम जिले में कोच्चि से 38 km दूर अरब सागर के किनारे स्थित मुनम्बम में ये दर्द एक दो-लोगों का नहीं, 610 परिवारों का है। इनमें 510 ईसाई और 100 हिंदू परिवार हैं। ये लोग मुनम्बम प्रॉपर्टी नाम से मशहूर 404 एकड़ जमीन के लिए करीब 60 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। लोगों के मुताबिक उन्होंने फारूक कॉलेज मैनेजमेंट से यह जमीन खरीदी थी। 2019 में वक्फ बोर्ड ने उनकी जमीन वक्फ संपत्ति के तौर पर रजिस्टर कर ली। अब वहां का वक़्फ़ बोर्ड सरकार से लोगों को बेदखल करने की मांग कर रहा है।
पिछले दो साल से वक्फ बोर्ड के खिलाफ मुनम्बम में विरोध-प्रदर्शन जारी है। बीते दो महीने के दौरान विवाद तेज हो गया है, जब से वक्फ (अमेंडमेंट) बिल, 2024 की सुगबुगाहट तेज़ हुई. मुनम्बम जैसे विवाद देश के कई हिस्सों में हैं, जहाँ वक़्फ़ संपत्ति के दावेदारों से अदालती लड़ाइयाँ चल रही हैं.
2022 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में वक्फ बोर्ड के पास लगभग 7.87 लाख संपत्तियां हैं, जिनमें से सबसे अधिक यूपी में स्थित हैं. दिलचस्प है, कि इसमें नई संसद की भूमि को भी शामिल करने की बात कही जा रही थी. सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत, दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 2021 में अपनी छह धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें से कुछ 100 साल से भी पुरानी हैं.
इन संपत्तियों में मानसिंह रोड पर मस्जिद ज़ब्ता गंज, रेड क्रॉस रोड पर जामा मस्जिद, उद्योग भवन के पास मस्जिद सुनहरी बाग रोड, मोतीलाल नेहरू मार्ग के पीछे मजार सुनहरी बाग रोड, कृषि भवन रोड पर मस्जिद और एक अन्य संपत्ति शामिल हैं. अब सवाल है, क्या वक़्फ़ संशोधन विधेयक से सम्पत्तियों का झगड़ा समाप्त हो जायेगा, या विवाद और बढ़ जायेगा?

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