उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट: हिमांशु शेखर
बलिया उत्तरप्रदेश:---मोगरा शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा महकता है। मोगरे को अगर हल्का "स्ट्रेस" दिया जाए तो यह फूल आने में मदद करता है। अगर आप इसे कुछ दिन तक पानी कम दें और फिर अच्छी धूप और खाद दें, तो यह पौधे को फूल देने के लिए प्रेरित करता है। इसे वाटर स्ट्रेस ब्लूमिंग कहा जाता है। यह ट्रिक बागवानी में बहुत कारगर मानी जाती है। मोगरा की कई किस्में होती हैं, लेकिन कुछ खास किस्में ऐसी होती हैं जो गर्मियों में भी खूब फूल देती हैं और गर्मी को अच्छी तरह सहन कर सकती हैं। मोतिया या बेला भारत में सबसे लोकप्रिय किस्म है खासकर उत्तर भारत में। यह गर्मियों में सबसे अधिक फूल देती है। इसकी खुशबू बहुत तेज़ होती है और इसका फूल छोटा-मोटा-गोल होता है। आगे लेख में मैं आपको विस्तार से मोगरे की देखभाल की कुछ खास बातें और गर्मियों में खराब होने के पीछे के कारण बता रहा हूँ जिनपर ध्यान दिया जाए तो आपका मोगरे का पौधा स्वस्थ रहेगा और फूल भी दे सकता है।
■ मोगरा को कैसी मिट्टी में लगाये:-
मोगरा के लिए मिट्टी का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी जड़ें नमी तो चाहती हैं लेकिन पानी में डूबी नहीं रहनी चाहिए। इसलिए मिट्टी को भुरभुरी, उपजाऊ और हल्की अम्लीय होना चाहिए। अच्छी मिट्टी की विशेषता में अच्छी जल निकासी, भुरभुरी, हल्की और पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।
◆ आदर्श मिट्टी का मिश्रण: अगर आप गमले में लगा रहे हैं, तो यह मिक्स अच्छा रहेगा।
• 40% बगीचे की मिट्टी।
• 30% गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट।
• 20% रेत – जल निकासी के लिए।
• 10% कोकोपीट या सुखी पत्ती की खाद।
नोट:- यदि आप के क्षेत्र की मिट्टी भारी यानी क्ले सॉइल है, तो उसमें रेत और खाद अच्छी मात्रा में मिलानी चाहिए।
■ मोगरे की छटाई कब करें:
तेज़ गर्मी में मोगरे की छटाई बहुत सावधानी से करनी चाहिए, ताकि पौधा और भी स्ट्रेस में न चला जाए। आमतौर पर गर्मी के मौसम में पौधे की छटाई करने से बचना चाहिए, लेकिन अगर सही समय और तरीके से छटाई की जाए तो यह पौधे के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है।
◆ गर्मियों में मोगरे की छटाई के लिए सही समय:
1) अप्रैल-मई के शुरुआती हफ्ते: अगर गर्मी बहुत ज़्यादा हो रही हो तो मार्च के आखिरी सप्ताह से अप्रैल के पहले हफ्ते तक छटाई करना सही रहता है। इस समय मोगरा अभी पूरी तरह से गर्मी में प्रवेश नहीं करता और इस दौरान पौधा ज्यादा स्ट्रेस में नहीं होता।
2) हवा और नमी को ध्यान में रखें: जब गर्मी बहुत अधिक हो (40°C के ऊपर), तो पौधे को थोड़ा समय देना चाहिए, ताकि वह पूरी तरह से स्थिर हो जाए। अधिक गर्मी में छटाई से पौधा कमजोर हो सकता है, और फूलों का आना भी प्रभावित हो सकता है।
3) छटाई करने का सही तरीका: सूखी या मुरझाई शाखाओं को हटा दें, अत्यधिक बढ़ी हुई शाखाओं को काटें, मुलायम या हल्के तनों को न काटें क्योंकि इससे पौधा और अधिक गर्मी से प्रभावित हो सकता है।
◆ कुछ अन्य सुझाव:
★ पानी देने से पहले छटाई करें और बाद में पौधे को भरपूर पानी दें।
★ बड़े बदलाव न करें: गर्मी में बहुत अधिक छटाई करने से बचें, क्योंकि पौधे को ज्यादा ट्रॉमा हो सकता है। हल्की छंटाई से ही काम चलाएं।
वर्तमान समय मे वातावरण में होरहे लगातार बदलाव का असर पौधों के जीवन चक्र पर भी पड़ रहा है। जिसके प्रभाव से अक्सर हरे भरे पौधें भी अचानक से खराब हो जारहे हैं। वैसे तो मोगरा एक गर्मियों का पौधा माना जाता है, लेकिन फिर भी गर्मियों में मोगरा का खराब हो जाना सभी के लिए एक आम समस्या है।
जिसके पीछे कुछ कारण होते हैं। जैसे:
1) तेज़ धूप से पत्तियाँ झुलस जाती हैं। मोगरा 5 से 6 घंटे तक कि धूप पसंद करता है। पर जब तापमान 40°C या उससे ऊपर हो जाए, तो पत्तियाँ झुलसने लगती हैं और कलियाँ झड़ जाती हैं। फूल आना बंद हो जाता है। खासकर अगर पौधा दोपहर की तेज धूप में रखा हो। मोगरा को गर्म और नम जलवायु बहुत पसंद है। इसके लिए आदर्श तापमान दिन का 25°C से 35°C तक और रात का 15°C से 25°C के बीच ठीक रहता है।
2. पानी की ग़लत मात्रा। गर्मी में पौधे को ज़रूरत से कम पानी मिलेगा तो वह सूखने लगता है। वहीं ज़्यादा पानी देने पर जड़ सड़ सकती है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है।
3. गमले की मिट्टी का गरम हो जाना। गमले की मिट्टी धूप में बहुत गरम हो जाती है, जिससे जड़ें पकने लगती हैं और पौधा खराब होने लगता है।
4. उर्वरक से जल जाना। गर्मियों में तेज़ धूप और साथ में अधिक मात्रा में रासायनिक खाद देने से जड़ जल सकती है, जिससे पौधे को नुकसान होता है।
5. कीट और फंगस का हमला। गर्मी और नमी के कारण चेपा, सफेद मक्खी और पाउडरी फफूंदी जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं।
■ उपाय क्या हैं?
● दोपहर की धूप से बचाएँ – पौधे को ऐसी जगह रखें जहाँ सुबह की धूप मिले और दोपहर को छांव रहे।
● सही समय पर पानी दें – सुबह जल्दी या शाम को जब मिट्टी थोड़ी ठंडी हो। रोज़ाना मिट्टी को चेक करें – ऊपर की सतह सूखने पर ही पानी दें।
● गमले को ढकें या मिट्टी पर मल्च डालें – इससे मिट्टी ठंडी रहेगी और नमी भी बनी रहेगी।
● जैविक खाद का भी उपयोग करें – जैसे वर्मी कम्पोस्ट या गोबर की खाद, और वो भी कम मात्रा में।
● नीम तेल का छिड़काव करें – कीटों और फंगस से बचाने के लिए हर 7-10 दिन में एक बार नीम का तेल पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
मोगरा का खराब होना सिर्फ गर्मी या पानी की वजह से ही नहीं होता, बल्कि कई छुपे हुए कारण भी हो सकते हैं जो अक्सर ध्यान नहीं दिए जाते। लेख में आगे कुछ ऐसे ही कम ध्यान दिए जाने वाले कारण बताये है।
जो अगर नजरअंदाज किए जाए तो मोगरे को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
1) गमले में जगह की कमी: इसका असर फूल और पत्तों की ग्रोथ पर पड़ता है, और पौधा धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है। इसलिए हर 1.5–2 साल में पौधे को बड़ा गमला दें या उसकी जड़ों की हल्की छंटाई करें।
2) मिट्टी की गुणवत्ता का गिरना: गमले की पुरानी मिट्टी से पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं और वह सख्त हो जाती है।
इससे पानी और हवा जड़ों तक नहीं पहुँच पाते। हर साल मिट्टी की ऊपरी 2–3 इंच परत निकालकर नई, ताज़ा मिट्टी और खाद मिलाएँ।
3) पानी में क्लोरीन या हार्ड वाटर: नल का पानी अगर बहुत कठोर है या उसमें क्लोरीन ज़्यादा है, तो यह जड़ों को नुकसान पहुँचा सकता है। उपाय के लिए पानी को एक बाल्टी में भरकर 6–8 घंटे छोड़ दें, फिर पौधे को दें।
4) लगातार एक ही खाद देना: बार-बार एक ही तरह की खाद जैसे सिर्फ यूरिया या गोबर खाद देने से पौधा सिर्फ पत्तियाँ बढ़ाता है, लेकिन फूल नहीं देता। इसके उपाय में फूलों के लिए संतुलित खाद जैसे NPK – 10:30:20 दें और हर महीने अन्य खाद बदल बदल के दें।
5) हवा न लगना या बहुत घनी जगह पर पौधा रखना: मोगरे को खुली हवा पसंद होती है। अगर वह बहुत घनी या बंद जगह में है तो उसमें फंगस या कीट लग सकते हैं। इसे हवादार स्थान पर रखें जहाँ धूप और हवा दोनों मिले।

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