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    भगवती का रहस्य : “आदिशक्ति का अनन्त रहस्य : सब रूपों में वही माँ


    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट: हिमांशु शेखर 
    बलिया उत्तरप्रदेश:---एक बार नारद जी ने विनम्रता से प्रश्न किया—
    “माँ! यह जगत भिन्न-भिन्न देव रूपों से भरा हुआ है। कभी आप भवानी कहलाती हैं, कभी दुर्गा, कभी काली, तो कभी विष्णु! यह रहस्य क्या है?”

    माता मुस्कुराईं और प्रेमभरे स्वर में बोलीं—
    “वत्स! यह सब मेरा ही विस्तार है।
    समय और परिस्थिति के अनुसार मैं रूप बदल लेती हूँ।

    जब शिव के अर्धांग में प्रकट होती हूँ, तब भवानी कहलाती हूँ।
    जब धर्म की रक्षा हेतु शस्त्र उठाती हूँ, तब दुर्गा नाम से जानी जाती हूँ।
    जब कुपित होकर संहार करती हूँ, तब काली रूप धारण करती हूँ।
    और जब पालन करती हूँ, तब विष्णु रूप में दिखाई देती हूँ।

    नारद! यह मत मानो कि कृष्ण और मैं भिन्न हैं।
    राधातंत्र में मैंने स्वयं कृष्ण से कहा था—
    ‘हे प्रिय! मुझमें और तुममें कोई भेद नहीं। हरि, त्रिपुराके ही मूर्तिभेद हैं।’

    इसीलिए कृष्ण का श्यामवर्ण भी मेरा ही स्वरूप है।
    और पद्मपुराण में मैंने स्पष्ट कहा—
    ‘नारद! मैं ही ललिता हूँ और मैं ही कृष्ण हूँ।
    पुरुष और स्त्री रूप में वही एक शक्ति प्रकट होती है।
    ललिता रूप में स्त्री सौन्दर्य और कृष्ण रूप में पुरुष माधुर्य—दोनों मैं ही हूँ।’

    जब देवताओं को अमृत चाहिए था,
    तब मैं मोहिनी बनकर उन्हें अमृत पान कराने पहुँची।
    नवदुर्गा के रूप में मैं असुरों का विनाश करती हूँ।
    और जब समय आता है तो राम, कृष्ण, विष्णु जैसे अवतारों के पीछे भी मेरा ही शक्ति रूप कार्य करता है।

    ---

    🌸 माँ की वाणी सुनकर नारद जी भावविभोर हो उठे और बोले—
    “माँ! अब समझ आया कि यह सारा जगत एक ही महामाया का खेल है।
    शिव और शक्ति, कृष्ण और राधा, विष्णु और मोहिनी—सब आप ही हैं।
    आप ही पालन हैं, आप ही संहार हैं, आप ही प्रेम की माधुरी हैं।”

    माता ने करुणा से मुस्कुराकर आशीर्वाद दिया—
    “वत्स! यही सत्य है। जो मुझे हर रूप में देखता है, वही मुझे पा लेता है।”

    💫 निष्कर्ष—
    सारा संसार उसी सनातनी शक्ति का विस्तार है।
    वह एक ही माँ हैं, जो समयानुसार रूप बदलकर जगत की रक्षा करती हैं।

    🌼"एक ही माँ अनेक रूप धरे,भक्ति से जो देखे, सत्य स्वरूप करे।" 🌼

    🌹 जय आदिशक्ति माता 🌹🙏 राधे राधे भक्तों 🙏

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