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    बोध कथा || कटुताका त्याग ||



    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट: हिमांशु शेखर 
    बलिया उत्तरप्रदेश:---एक राजकुमार स्वभावसे बहुत उद्दण्ड और दुष्ट प्रवृत्तिका था। प्रजाके साथ राजा भी अपने बेटेकी करतूतोंसे परेशान था। एक बार उसके राज्यमें गौतम बुद्ध धर्मोपदेशके लिये आये। राजाने बुद्धसे राजकुमारको सुधारनेके लिये कोई उपाय पूछा।

                बुद्धने राजकुमारको अपने पास बुलाया और पास ही लगे पौधेसे कुछ पत्तियाँ तोड़कर खानेको दीं। राजकुमारने पत्तियाँ खायीं तो वे बहुत कड़वी थीं। अब उसके क्रोधका ठिकाना नहीं रहा। गुस्सेसे उसने पौधेको ही उखाड़कर फेंक दिया। 

                तब मुसकराकर बुद्धने राजकुमारसे पूछा— 'क्यों उखाड़ फेंका ?'

                राजकुमारने जवाब दिया— 'यह पौधा बहुत कड़वा था, आगे चलकर विषाक्त पेड़ हो जाता, इसलिये इसे आज ही उखाड़ देना चाहिये।'

                बुद्धने कहा— ' और तुम सब लोगोंसे कड़वा व्यवहार करते हो, उसे देखकर वे तुम्हारे साथ यही करें तो ?'

                 राजकुमारको बहुत ग्लानि हुई। वह विनम्रताकी प्रतिमूर्ति बन गया।

                 ❝कटुता नहीं, विनम्रता सबको प्रिय है।❞

     

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