उत्तर प्रदेश लखनऊ
इनपुट: सोशल मीडिया
लखनऊ:-- मौसमीय घटनाक्रम सभी को चौंका देने वाला रहा। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में स्थापित लिडार तथा वेदर स्टेसन से सात मिनट तक वर्षा की तीव्रता 105 मिमी प्रति घंटा मापी गयी प्रोफेसर शान्तनु रस्तोगी एवं डॉ. प्रभुनाथ प्रसाद ने बताया की मौसम विज्ञान की परिभाषा के अनुसार ऐसी घटना को बादल फटने की स्थिति मानी जाती है। अगर एक घंटे में 100 मिमी या उससे अधिक वर्षा होती है तो ऐसी स्थिति को क्लाउडबर्स्ट तथा अगर 50 मिमी तक होती है।
इसे फ्लैश फ्लड कहा जाता है शोध छात्रा मिनाक्षी सिंह अवलोकन में यह पाया कि कुल 34 मिनट में लगभग 38 मिमी वर्षा दर्ज की गई और इस दौरान बादलों की ऊँचाई 100 से 300 मीटर के बीच मापी गई। इस तरह की तीव्र वर्षा अक्सर विनाशकारी परिणाम लाती है।
जिनमें अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) प्रमुख है, इसलिए क्लाउडबर्स्ट जीवन, संपत्ति और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। डॉ. प्रभुनाथ प्रसाद ने बताया कि जलवायु परिवर्तन, वातावरण में नमी की अधिकता और वायुमंडलीय अस्थिरता जैसी परिस्थितियाँ इस तरह की चरम घटनाओं को और अधिक सामान्य बनाती जा रही हैं।

TREND