उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट: हिमांशु शेखर
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते ॥
यह मंत्र केवल स्तुति नहीं है, बल्कि देवी के 11 महाशक्ति स्वरूपों का आवाहन है। माना जाता है कि इसके जप से साधक चारों ओर से सुरक्षा कवच में आ जाता है और जीवन की कई अदृश्य बाधाएँ शांत होने लगती हैं।
मंत्र के प्रत्येक नाम का अर्थ और प्रभाव
जयंती — जो सदा विजय दिलाने वाली शक्ति है।
मंगला — जो मंगल दोष, अशुभ ग्रह प्रभाव और जीवन की अड़चनों को शांत करती है।
काली — जो भय, नकारात्मकता और अज्ञान का नाश करती है।
भद्रकाली — जो तंत्र-मंत्र, ऊपरी बाधा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती है।
कपालिनी — जो सोच, बुद्धि और मानसिक दिशा को शुद्ध करती है।
दुर्गा — जो कठिन परिस्थितियों से पार लगाने की शक्ति देती है।
क्षमा — जो अनजाने पाप, अपराध और देव-दोष से मुक्ति प्रदान करती है।
शिवा — वही शक्ति जिसका वर्णन दुर्गा सप्तशती में है, जो शिव की आज्ञा से युद्ध के लिए प्रकट होती है।
धात्री — जो धारण करने वाली, पोषण देने वाली शक्ति है और लक्ष्मी तत्व का प्रतिनिधित्व करती है।
स्वाहा — अग्नि की पत्नी, जो किए गए कर्मों का फल सुनिश्चित करती है।
स्वधा — जो पितरों को तृप्त करती है और पितृ बाधा को शांत करती है।
इस मंत्र की विशेषता
इस मंत्र का जाप बिना दीक्षा भी किया जा सकता है। इसमें देवी की 11 महाशक्तियाँ साधक की रक्षा करती हैं।
जप का नियम
जिनका जनेऊ संस्कार हुआ है, वे मंत्र के आगे ॐ लगाकर जप करें।
जिनका जनेऊ संस्कार नहीं हुआ है, वे ह्रीं बीज लगाकर जप करें।
न्यास केवल वही करें जिनके पास दीक्षा है, अन्यथा केवल सीधा जप करें।
रुद्राक्ष माला से जप करना श्रेष्ठ माना गया है।
साधना और सिद्धि
इस मंत्र की सिद्धि 11,000 जाप से मानी जाती है।
जप शांत मन, स्वच्छ स्थान और नियमित समय पर किया जाए तो प्रभाव गहरा होता है।
यह मंत्र साधक के जीवन में रक्षा, शांति, मानसिक स्थिरता, पितृ शांति और कर्म संतुलन लाने में सहायक माना जाता है।
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