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    श्रद्धा और विश्वास के साथ कथा श्रवण से ही कल्याण संभव : डॉ0 ओंकार नारायण


    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट:धीरज यादव 

    दुबहर, बलिया:-- क्षेत्र के शिवपुर दीयर नई बस्ती ब्यासी गांव में आयोजित शतचंडी महायज्ञ में संगीतमय कथा के प्रथम दिन ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। नैमिषारण्य से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉ.ओंकार नारायण भारद्वाज जी महाराज ने कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया कथा श्रवण ही मनुष्य का कल्याण कर सकता है। भागवत को समझना साक्षात भगवान को समझने के बराबर है।
     महाराज जी ने श्रीमद् भागवत महात्म्य के अंतर्गत गोकर्णोपाख्यान की कथा सुनाते हुए एक गहरा आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह मानव शरीर ही तुंगभद्र नदी है और इसमें वास करने वाली आत्मा ही आत्मदेव है। आत्मा का विवाह बुद्धि से हुआ है। यदि मनुष्य की बुद्धि धुंधली यानि मलीन होगी, तो उसका परिणाम धुंधकारी रूपी अत्याचार के रूप में ही सामने आएगा। इसलिए मनुष्य को अपनी बुद्धि को विवेकशालिनी बनाना चाहिए, और इस विवेक की प्राप्ति केवल सत्संग से ही संभव है। पितामह भीष्म के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार, पाप करने वाले से भी अधिक दंड का भागी वह व्यक्ति होता है जो समर्थ होते हुए भी पाप को नहीं रोकता। दुर्योधन तो पापी था ही, लेकिन पितामह भीष्म चाहते तो उसके पाप को रोक सकते थे। ऐसा न करने के कारण ही उनकी मृत्यु इतनी कष्टप्रद और भयानक हुई। उन्होंने संदेश दिया कि मानव वही है जिसमें मानवीय मूल्य हों। डॉ. ओंकार नारायण ने बताया कि महर्षि वेदव्यास जी ने जब इस ग्रंथ की रचना की, तब इसका नाम 'भागवत' था, जो बाद में 'श्रीमद् भागवत' हुआ। इसके पीछे गहरा मर्म है—'श्री' अर्थात जब मनुष्य को धन-वैभव का अहंकार हो जाए, तो उसे भागवत की शरण लेनी चाहिए, जिससे उसका अहंकार स्वतः दूर हो जाता है। उन्होंने कहा कि भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति के लिए भागवत कथा सुनना जरूरी है। कथा के दौरान विद्वान आचार्य रणजीत तिवारी, रोहित पांडेय, अनिमेष मिश्रा तथा अजीत मिश्रा द्वारा किए गए सस्वर वेद मंत्रों के उच्चारण से पूरा क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर रहा।
    कथा के प्रथम दिन मुख्य यजमान भगवान मिश्र, हरिहर तिवारी, पवन तिवारी, कामेश्वर पांडेय, विनोद सिंह तथा भरत मिश्रा ने सपरिवार व्यास पीठ का विधिवत पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद लिया। इस धार्मिक अनुष्ठान के अवसर पर गणेश जी सिंह, राजू मिश्रा, शशिकांत सिंह, पिंटू मिश्रा, मन्नू सिंह, राहुल मिश्रा, पवन गुप्ता सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु और माताएं-बहनें उपस्थित रहीं।

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