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    गंगा जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश करता है, नगवा में परंपरागत ढंग से मनाए जाने वाला मातमी पर्व मोहर्रम



    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट: धीरज यादव 

    दुबहर, बलिया:--क्रांति के महानायक शहीद मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवा में मातमी पर्व मोहर्रम सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश करता है। आजादी की अलख जगाने वाले इस ऐतिहासिक गांव ने देश की सांस्कृतिक विरासत और आपसी भाईचारे को भी सहेज कर रखा है।
    नगवा गांव में विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग निवास करते हैं। यहां सभी लोग एक-दूसरे के सुख-दु:ख में सहभागी बनते हैं। हिंदुओं के पर्व-त्योहारों में मुस्लिम समाज तथा मुस्लिम समाज के पर्व में हिंदू समाज के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते है, तथा पूरे उत्साह के साथ सहभागिता निभाते है। इसी परंपरा के तहत नगवा में पिछले लगभग 100 वर्षों से मोहर्रम का पर्व हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग मिल-जुलकर मनाते आ रहे हैं। ताजिया को चौक पर स्थापित करने से लेकर कर्बला में दफन किए जाने तक दोनों समुदायों के हजारों लोग पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं। गांव में मोहर्रम का जुलूस आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश देता है।
    न्यू हुसैनिया ताजिया कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने बताया कि नगवा गांव की यह परंपरा सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द का ऐसा उदाहरण है, जो समाज को एकजुट रहने की प्रेरणा देता है।

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