उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट : हिमांशु शेखर
बलिया उत्तरप्रदेश:--- प्राय: मौसम एवं जलवायु में हमें भ्रम होता रहता है कि मौसम एवं जलवायु वातावरण की दशाओं को प्रदर्शित करने की एक ही परिघटना है अथवा दो परिघटना है। यहां पर यह स्पष्ट कर देना उचित प्रतीत होता है कि सामान्यतया मौसम एवं जलवायु शब्दों का प्रयोग दैनिक जीवन में वातावरण की दशाओं के प्रदर्शन हेतु किया जाता है, कारण कि ये दोनों शब्द वातावरण की दशाओं को प्रकट करते हैं। किंतु वास्तव में मौसम एवं जलवायु में विशेष अंतर है। इस अंतर के कारण ही मौसम एवं जलवायु दोनों शब्दों का प्रयोग विभिन्न अर्थों में करना ही श्रेयस्कर होता है। इसलिए यहां पर मौसम एवं जलवायु को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
मौसम :-
'मौसम' शब्द अंग्रेजी भाषा के शब्द 'वेदर'
(Weather) का हिन्दी रूपांतरण है। वैसे मौसम शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द 'मौसिम' से हुई मानी जाती है।
किसी स्थान का मौसम उन सभी अंतरीक्षीय कारकों का योग होता है , जो तापमान, आर्द्रता, वर्षा एवं आकाशीय विक्षोभों से मिलकर अस्तित्व में आता है।
यद्यपि कि मौसम एक गतिशील एवं परिवर्तनशील परिघटना होती है, फिर भी उसको सामान्यिकृत एवं सरलीकृत करके एक संयुक्त स्वरूप प्रदान किया जा सकता है और परिभाषिक रूप में कहा जा सकता है कि "किसी क्षेत्र या स्थान विशेष में अल्प अवधि ( क्षण - प्रतिक्षण, घण्टे - दर - घण्टे , दिन - प्रति - दिन अथवा महीने - दर - महीने घटित होने वाला वायु मण्डलीय परिवर्तन ( ताप, दाब, आर्द्रता, वर्षा,वायु वेग आदि कारकों में हुए परिवर्तन को उस क्षेत्र या स्थान विशेष का मौसम कहा जाता है।
इस प्रकार स्पष्टत: कहा जा सकता है कि मौसम किसी विशेष स्थान एवं समयावधि में घटित होने वाले वायुमण्डलीय दशाओं का परिचायक होता है।
मौसम के मुख्य तत्व :-
दबाव, गति, वाष्पीकरण एवं संघनन , विकिरण तथा शीतलन आदि से जुड़े भौतिकी के नियमों के आधार पर मौसम की प्रणालियों का विश्लेषण किया हजार सकता है, जिनके आधार पर मौसम के निम्नांकित तत्व हो सकते हैं-
1. दाब एवं ऊंचाई
2. तापमान एवं घनत्व
3. विकिरण
4. आर्द्रता,मेघाच्छादन,वर्षण
5. वायु गति
मौसम की विशेषताएं :-
1. मौसम किसी स्थान की अल्पावधि की वायुमंडलीय दशाओं का द्योतक होता है।
2. मौसम द्वारा छोटे क्षेत्र की वायुमंडलीय दशाओं को प्रकट किया जाता है।
3. किसी स्थान की अल्पावधि की सम्पूर्ण वायुमंडलीय दशाओं के योग को मौसम द्वारा प्रकट किया जाता है।
4. मौसम में क्षण - प्रतिक्षण बदलाव होता रहता है।
5. मौसम वायुमंडलीय संचरण, आर्द्रता एवं वर्षण के माध्यम से सूर्यातप द्वारा उत्पन्न विषमताओं को दूर करता है।
जलवायु :-
'जलवायु' शब्द 'जल' एवं 'वायु' शब्द से मिलकर बना है,जिसका शाब्दिक अर्थ वायुमंडल में निहित जल (वर्षण) एवं वायु प्रारूप से है। 'जलवायु' शब्द अंग्रेजी के शब्द 'क्लाइमेट'
( Climate) का हिंदी रूपांतरण है और क्लाइमेट( Climate) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द 'क्लाईमा' (Clima) से हुई है। 'क्लाईमा' शब्द का अर्थ 'पृथ्वी का झुकाव' अर्थात् 'दिन एवं रात की अवधि' माना जाता है। इस प्रकार जलवायु मुख्य रूप से अक्षांश ( पृथ्वी के क्षूकाव ) पर निर्भर करती है।
यदि परिभाषिक रूप में देखा जाय तो "किसी स्थान के मौसम की दीर्घ अवधि की घटनाओं के आधार पर निर्धारित मौसम के प्रतिरूप को उस स्थान का 'जलवायु' कहा जाता है।
इस प्रकार स्पष्ट है कि मौसम के दीर्घकालिक औसत को जलवायु कहा जाता है। किसी विस्तृत क्षेत्र के लगभग 30 वर्षों के औसत मौसमी दशाओं को उस स्थान का जलवायु कहा जाता है।
जलवायु को निर्धारित करने वाले कारक :-
जलवायु को निर्धारित करने वाले कारकों में सूर्यातप, तापमान, वायु दाब, वायु की दिशा, आर्द्रता एवं संघनन, वर्षण एवं वर्षा,समुद्र तल से ऊंचाई, समुद्री तट से दूरी,सागरीय जल धाराएं, अक्षांशीय स्थिति, जल एवं स्थल का वितरण, धरातल का स्वभाव, सूर्य रोशनी की अवधि, उच्चावच एवं वनस्पतियां आदि मुख्य हैं।
जलवायु की विशेषताएं :-
1. जलवायु दीर्घ कालीन मौसम की औसत दशाओं का योग होता है।
2. जलवायु के अंतर्गत दीर्घकालीन अवधि के दोरान उत्पन्न वायुमंडलीय विक्षोभों तथा परिवर्तनों को भी शामिल किया जाता है।
3. जलवायु विस्तृत क्षेत्र वायुमंडलीय दशाओं को प्रकट करता है।
4. पृथ्वी एवं वायुमंडल की दीर्घ काल की ऊर्जा एवं पदार्थों के विनिमय की प्रक्रिया का आभास जलवायु द्वारा किया गया जाता है।
5. किसी प्रदेश की स्थाई वायुमंडलीय विशेषताओं का प्रतिनिधित्व जलवायु द्वारा किया जाता है।
इस प्रकार यदि स्पष्टतया मौसम एवं जलवायु में अंतर को देखा जाय तो कहा जा सकता है कि मौसम सामान्य रूप से अल्प अवधि या 24 घंटे की वातावरणीय दशाओं का योग होता है , जबकि जलवायु दीर्घ अवधि की मौसम संबंधी दशाओं का योग होता है।
मौसम एवं जलवायु के विभिन्न तत्व, दशाएं , परिस्थितियां, परिघटनाएं एवं प्रभाव को निम्नांकित चित्रों के माध्यम से समझा जा सकता है :-

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