उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट:धीरज यादव
दुबहर, बलिया:-- शिक्षा क्षेत्र दुबहर स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र पर प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित निपुण भारत मिशन के तहत मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) प्रशिक्षण के चौथा बैच का दूसरा दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में क्षेत्र के दर्जनों प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षामित्र उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दूसरे दिन मुख्य प्रशिक्षक सुनील कुमार गुप्ता, प्रियेश तिवारी, आशुतोष कुमार सिंह, अमित कुमार सिंह, प्रेरणा मिश्रा तथा तकनीकी सहायक धर्मेंद्र चौरसिया ने संयुक्त रूप से सत्रों का संचालन किया।प्रशिक्षकों ने साक्षर भारत मिशन और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में बच्चों को आधुनिक तकनीकी विधाओं एवं शिक्षण अधिगम सामग्री के माध्यम से पढ़ाने के अभिनव तरीकों से अवगत कराया।
भाषा एवं गणित की बुनियादी समझ शिक्षकों को कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों में भाषा और गणित की मौलिक अवधारणाओं को सहज और रोचक तरीके से विकसित करने के सूत्र बताए गए। नवीन संदर्शिका एवं प्रिंट रिच सामग्री सत्र के दौरान नवीन शिक्षण संदर्शिका का विस्तृत परिचय कराया गया। साथ ही, कक्षाओं को 'प्रिंट रिच वातावरण' में बदलने और उपलब्ध चार्ट, पोस्टर व शिक्षण सामग्रियों का प्रभावी उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षकों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बच्चों को केवल रटने की बजाय समझ के साथ पढ़ने और स्वतंत्र रूप से अपने विचार लिखने के लिए किस प्रकार तैयार किया जाए।अधिगम स्तर में पीछे छूटे बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए 'कैच अप' सत्रों के सफल संचालन की तकनीक साझा की गई।
अंग्रेजी की नई पाठ्यपुस्तक 'संतूर': परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में लागू नई अंग्रेजी पाठ्य पुस्तक 'संतूर' के स्वरूप, पाठ्यक्रम तथा इसकी गतिविधियों को कक्षा में लागू करने की रणनीति पर गहन चर्चा हुई। तकनीकी सहायक धर्मेंद्र चौरसिया ने डिजिटल शिक्षण उपकरणों और निपुण लक्ष्य ऐप के तकनीकी पहलुओं से शिक्षकों को अवगत कराया, जिससे शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व सुगम बनाया जा सके। प्रशिक्षण के अंत में प्रशिक्षकों ने कहा कि FLN का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा प्राथमिक स्तर पर ही बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान में निपुण बने।उपस्थित सभी शिक्षकों एवं शिक्षामित्रों ने प्रशिक्षण में सीखी गई गतिविधियों को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करने का संकल्प लिया।

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