नई दिल्ली
इनपुट: सोशल मीडिया
नई दिल्ली:--- दिल्ली की आबादी को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है. कभी कहा जाता है कि दिल्ली की आबादी दो करोड़ है, तो कभी कहा जाता है कि ढाई करोड़ है तो कभी इसे 3 करोड़ तक बताया जाता है. हालांकि वर्ष 2011 के बाद अभी तक जनगणना नहीं हुई है, इसलिए दिल्ली की अवधि को लेकर के प्रयास लगाए जाते हैं. लेकिन, अभी हाल ही में दिल्ली में जनसंख्या वृद्धि को लेकर के राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग द्वारा तैयार जनसंख्या अनुमानों पर तकनीकी समूह की एक रिपोर्ट के द्वारा जानकारी मिली है.
इस रिपोर्ट में 1 जुलाई 2013 को दिल्ली की अनुमानित जनसंख्या एक करोड़ 76 लाख 70 हजार थी. इसके बाद से वर्ष 2024 तक जनसंख्या में 23.85% की अनुमानित वृद्धि हुई. अनुमानित रिपोर्ट के अनुसार 1 जुलाई, 2024 दिल्ली की जनसंख्या बढ़कर के 2,18,84,000 हो गई है. यह भी कहा जाता है कि जिस अनुपात में दिल्ली की जनसंख्या बड़ी है, उस हिसाब से सरकारी स्कूलों की संख्या नहीं बढ़ी. साथ ही स्कूलों में न शिक्षक, वाइस प्रिंसिपल और प्रिंसिपल की भी संख्या नहीं बढ़ी. हालांकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई. लेकिन, उनके लिए संसाधनों में उस हिसाब से बढ़ोतरी नहीं हुई.
स्कूलों की संख्या बढ़ी: शिक्षा निदेशालय के एडिशनल डायरेक्टर मोहिंदर पाल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दिल्ली में वर्ष 2013 व वर्ष 2024 में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या अलग-अलग बताई गई है. दिल्ली में वर्ष 2012-13 में सरकारी स्कूलों की संख्या 969 थी, जो कि 2023-24 में बढ़कर के 1061 पहुंच गई. इन स्कूलों में वर्ष 2012-13 में नामांकित छात्रों की कुल संख्या 15,52,026 थी जो 2023-24 में बढ़कर 17,03,292 पहुंच गई.
ये पद नहीं भरे पूरे: उधर दिल्ली के स्कूलों में प्रिंसिपल के स्वीकृत पद, भरे हुए पद और खाली पदों की बात करें तो वर्ष 2013 में प्रिंसिपल के स्वीकृत पद 950 थे, जिनमें से 679 भरे थे और 271 खाली थे. वहीं, वर्ष 2024 में प्रिंसिपल के पदों की संख्या 950 ही रही, जिनमें से 728 पद भरे और 222 पद खाली रहे. वहीं 2013 में वाइस प्रिंसिपल के स्वीकृत पदों की संख्या 1295 थी, जिनमें से 1041 भरे और 254 पद खाली थे. उधर 2013 में शिक्षकों के 53,500 पर स्वीकृत थे, जिनमें 35,614 पद भरे थे और 17,886 पद खाली थे. 2024 में शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या बढ़कर 59,582 हो गई, जिनमें 41,614 भरे और 17,968 पद खाली रहे.
पास-फेल का अनुपात: शिक्षा निदेशालय के आकड़ों के अनुसार, 2011-12 में 8वीं कक्षा में 1,83,208 छात्रों ने परीक्षा दी. इनमें से सभी बच्चे पास हुए. वहीं 2023-24 में आठवीं के 2,34,894 बच्चों ने परीक्षा दी, जिसमें से मात्र 1,88,232 बच्चे ही पास हुए और बाकी बच्चे फेल हो गए थे. वहीं वर्ष 2011-12 में 9वीं कक्षा की परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या 2,01,265 थी, जिसमें से 1,91,411 बच्चे ही पास हुए. उधर 2023-24 में नौवीं कक्षा की परीक्षा में 2,77,198 बच्चे बैठे, जिसमें से 1,75,867 बच्चे ही पास हुए.
विधानसभा में दिया गया जवाब: इसके अलावा वर्ष 2011-12 में 11वीं की परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या 1,66,233 थी, जबकि पास होने वाले छात्रों की संख्या 1,26,468 थी. साल 2023-24 में 11वीं की परीक्षा में 2,16,857 लाख बच्चे परीक्षा में बैठे, जिसमें से 1,64,943 छात्र ही पास हुए. यह सभी आंकड़े और जानकारी विधानसभा में हाल ही में दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक अरविंद सिंह लवली द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई थी।

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