उत्तर प्रदेश अयोध्या
इनपुट : संतोष कुमार मिश्रा
नई दिल्ली :--- हे भगत तुम लौट के आना धरा पे।
कातिलों के काफिले बढ़ने लगे है।।
दर्द से ब्याकुल धार तुमको बुलाएं।
गाँव तक भी रक्त रंजित हो रहे है।।
देश के गद्दारों को देना सबक तुम।
भारती के लाज पर लांछन लगे हैं।।
बंट गये हैं लाल ये अपने वतन के।
जख्म अपने आप को देने लगे हैं।।
जल रहा है आग में अपना वतन।
भेद ये अपनो से ही करने लगे है।।
हम नहाये रक्त जब टुकड़े हुए थे।
नफरतों के धार अब बहने लगे है।।
धर्म मज़हब में बंटे अब लोग सारे।
रक्त रंजित ये धरा को कर रहे हैं।।
हे भगत आ के धरा अपनी संभालो।
हम नमन दिल से तुम्हारा कर रहे है।।
गाँव की गलियां कहर ने है लगीं।
शहर के चहरे बदलने भी लगे है।।
हर कोई खुद को बताता श्रेष्ठ है।
हम यहाँ अब धर्म में बंटने लगे है।।
निर्मल त्रिपाठी दिल्ली ✍️

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