उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट:धीरज यादव
बलिया:--भारत देश "अनेकता में एकता" का देश है। भौगोलिक विविधता के कारण
यहां विभिन्न धर्मो, जातियों एवं संप्रदायों के लोग रहते हैं। अनेक धर्म व जातियों के लोग होने से यहां सभी के अपने-अपने त्यौहार हैं। इस दृष्टिकोण से देखा जाए, तो भारत में प्रत्येक माह किसी न किसी त्योहार की धूम रहती है। त्यौहार देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाते हैं।
"ईद" मुसलमानों का एक ऐसा त्यौहार है, जिसे दुनिया के कई मुस्लिम देशों में भले ही बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता हो, किंतु अन्य देशों से अलग भारत एक ऐसा देश है, जहां दूसरे धर्मों के लोग भी मुसलमान भाइयों को ईद की मुबारकबाद देते हुए इस पवित्र त्यौहार में शरीक होकर भारत की सर्वप्रमुख विशेषता 'अनेकता में एकता' का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। ईद-उल-फितर इस्लाम के उपवास के महीने 'रमजान' के समाप्त होने के बाद मनाई जाती है। इस्लामी कैलेंडर के सभी महीनों की तरह इसकी शुरुआत भी नए चांद के दिखने पर होती है। इस ईद में मुसलमान तीस दिनों तक रोजा रखने के बाद पहली बार दिन में खाना खाते हैं और अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें महीने भर रोजा रखने की शक्ति दी। ईद की तिथि से काफी पहले से ही लोग इस त्यौहार की तैयारी में जुट जाते हैं। घरों की साफ-सफाई की जाती है एवं परिवार के सभी सदस्यों के लिए नए कपड़े सिलवाए जाते हैं। ईद के दौरान नए पकवान बनाने के अतिरिक्त, नए कपड़े भी पहने जाते हैं और परिवार तथा दोस्तों के बीच तोहफों का आदान-प्रदान किया जाता है। ईद के दिन मस्जिद में सुबह की नमाज से पहले, नमाजी गरीबों को खैरात या दान देते हैं, जिसे जकात-उल-फितर कहा जाता है।
ईद के दिन ईदगाह में जाकर सबके साथ नमाज अदा करना शुभ माना जाता है। नमाज के दौरान छोटे-बड़े का कोई अंतर नहीं रहता। राजा हो या रंक सभी एक ही पंक्ति में खड़े होकर नमाज़ पढ़ते हैं। नमाज खत्म होने के बाद ईद की मुबारकबाद 'ईद मुबारक' कहकर देते हैं। उम्र में अपने से छोटे लोगों को आशीर्वाद स्वरुप जो उपहार एवं धन दिया जाता है, उसे ईदी कहा जाता है। सेवइयों का ईद के रोज अपना अलग ही महत्व है, इसी की वजह से इसे "मीठी ईद" के नाम से भी जाना जाता है।
दुबहर:--भाईचारे का प्रतीक ईद-उल-फितर रमजान की मेहनत का इनाम और खुशियों का पैगाम है। ईद-उल-फितर का अर्थ होता है रोजा खोलने का त्यौहार, जो रमजान के कठिन लेकिन पवित्र सफर का पूरा होने का संदेश देता है। ईद पर्व दया, प्रेम और भाईचारे का भी संदेश देता है।
उक्त बातें घोड़हरा के पूर्व प्रधान एवं मंगल पांडेय विचार सेवा समिति के सक्रिय सदस्य नफीस अख्तर ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। कहा कि हमारी रब से यही दुआ है कि ईद का त्यौहार सबके लिए खुशियों की सौगात और जीवन में बहार लाए। अल्लाह आप सभी को खुशी और समृद्धि से भरा स्वस्थ जीवन प्रदान करें। उन्होंने ईद की मुबारकबाद देते हुए सभी मुस्लिम बंधुओ से अपील की है कि ईद का त्यौहार मिलजुलकर प्रेम और भाईचारे के साथ सौहार्द पूर्ण वातावरण में हर्षोल्लास पूर्वक मनाएं।

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