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    शक्ति पूजा का पर्व : नवरात्री-ईशान पाठक

                                                                                             
    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट : हिमांशु शेखर 
                    

    नवरात्रि का अर्थ है " नौ रातें"। 

    बलिया उत्तरप्रदेश:--यह साल में चार बार आती है (चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ), लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे अधिक मनाई जाती है। नवरात्रि में मां दुर्गा और उनके नौ रूपो की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर) में आती है। यह महालया अमावस्या के अगले दिन से शुरू होती है और दशहरा तक चलती है। नवरात्रि में लोग व्रत रखते हैं। गरबा और डांडिया (विशेषकर गुजरात में) जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। मंदिरो तथा घरों में भजन, कीर्तन तथा दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है। कलश स्थापना की जाती है और अखंड ज्योति जलाई जाती है। हर दिन मां दुर्गा के  स्वरूप की पूजा होती है।

    पहले दिन , शैलपुत्री  देवी की पूजा होती है जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री है। 
    दूसरे दिन, ब्रह्मचारिणी देवी की जो तपस्या और संयम की देवी है। 
    तीसरे दिन, चंद्रघंटा देवी की जो शांति और वीरता की देवी है। 
    चौथे दिन, कूष्मांडा देवी की जो ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री हैं। 
    पाँचवे दिन, स्कंदमाता देवी की जो कार्तिकेय की माता है। 
    छठे दिन, कात्यायनी देवी की जो दानवों का संहार करने वाली देवी है।
    सातवे दिन, कालरात्रि देवी की जो अंधकार का नाश करने वाली है। 
    आठवें दिन महागौरी देवी की जो शांति और सौंदर्य की देवी हैं। 
    और अंतिम या नवें दिन  सिद्धिदात्री देवी की पूजा होती है जो सभी सिद्धियां देने वाली हैं।
    नवरात्रि कि शुरुआत कलश स्थापना या घटस्थापना से होती है। जिसे मां दुर्गा का आह्वान माना जाता है। सुबह-शाम देवी की आरती, दुर्गा चालीसा तथा सप्तशती का पाठ किया जाता है। कई जगहों पर कन्या पूजन भी होता है जिसमें आठवीं या नौवीं तिथि को छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उन्हें भोजन और उपहार दिया जाता है।

    अखंड ज्योति जलाई जाती है जिसकी एक परंपरा भी  है। परंपरा के अनुसार यह ज्योति नौ दिन और रात लगातार जलती रहती है जो शक्ति और आस्था का प्रतीक है। मंदिरो और  पंडालों में भक्ति गीत, नाटक, और अन्य सांस्कृतिक  कार्यक्रमों का आयोजन होता है। नवरात्रि मनाने के कई कारण  हैं। जैसे:-

    File phone of:-ईशान पाठक            

    1- देवी शक्ति की पूजा के लिए:- माना जाता है की इन दिनो मां दुर्गा पृथ्वी पर आती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।


    2- महिषासुर पर विजय :-
    शारदीय नवरात्रि असुर महिषासुर पर मां दुर्गा के विजय की याद में  मनाई जाती है। यह पर्व संदेश  देता है की अंत में अच्छाई की ही जीत होती है।

    3- भगवान श्री राम की विजय से जुड़ा महत्वः- मान्यता है की श्रीराम ने रावण से युद्ध करने से पहले देवी दुर्गा की पूजा की थी। उनकी आराधना से ही उन्हे शक्ति मिली और विजयादशमी के दिन उन्होने रावण का वध किया।

    यह पर्व हमें सिखाता है की बुराई के आगे हमेशा सच्चाई की जीत होती है। नवरात्रि को 'शक्ति की उपासना का पर्व 'भी कहा जाता है। नवरात्रि मनाने का मुख्य कारण है मां दुर्गा की उपासना करना और यह याद रखना की सत्य और धर्म की सदा विजय होती है। यह केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। 

    अंतत:

    ' सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
    शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते ॥'

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