Type Here to Get Search Results !

custum trend menu

Stories

    अभिमान आते ही व्यक्ति का पतन निश्चित : आनंद बिहारी शास्त्री


    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट:धीरज यादव 

    दुबहर, बलिया:-- क्षेत्र के धरनीपुर गांव में नवनिर्मित श्री हनुमत एवं मां दुर्गा मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन सोमवार की देर शाम भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। सुप्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य आनंद बिहारी शास्त्री ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
    महारास का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि जब कोई महान व्यक्ति आपको अपने सान्निध्य में रखता है, तो उसे अपनी योग्यता का अभिमान नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की उदारता समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि रास के समय जब गोपियों के मन में अपनी सुंदरता और पात्रता का अहंकार आया, तो भगवान अंतर्ध्यान हो गए। उन्होंने कहा कि अभिमान आते ही व्यक्ति का पतन निश्चित है। जब गोपियों का अहंकार मिटा, तब प्रभु पुनः प्रकट हुए और दिव्य रास रचाया। इसी प्रसंग में उन्होंने बताया कि महादेव भी गोपी रूप धारण कर रास देखने पहुंचे, जिन्हें आज वृंदावन में 'गोपेश्वर महादेव' के नाम से पूजा जाता है। कथा के क्रम में भगवान के मथुरा प्रस्थान, कंस वध और सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने का प्रसंग सुनाया गया। आचार्य ने बताया कि मात्र 12 वर्ष की आयु में भगवान ने गुरु के मृत पुत्रों को यमलोक से वापस लाकर अपनी दिव्यता का परिचय दिया। यहीं उनकी मित्रता सुदामा जी से हुई, जो निःस्वार्थ प्रेम की मिसाल है।
    उद्धव-गोपी संवाद पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जो उद्धव अपने ज्ञान के अहंकार में डूबे थे, गोपियों के निश्छल प्रेम और विरह को देखकर उनका ज्ञान बौना साबित हो गया। उन्होंने सिद्ध किया कि भावपूर्ण भक्ति हमेशा शुष्क ज्ञान पर भारी पड़ती है।
     कथा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का जीवंत वर्णन किया गया। आचार्य ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि माता-पिता को बच्चों का विवाह उनकी योग्यता और संस्कारों के अनुरूप ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी जी सात्विक और सत्संगी थीं, जबकि उनका भाई रुक्मी उनका विवाह शराबी शिशुपाल से करना चाहता था। अधर्म के विरुद्ध रुक्मिणी जी ने कृष्ण को पत्र भेजकर अपनी मर्यादा की रक्षा की और अंततः प्रभु ने उन्हें अपनी शरण में लिया।
    आयोजक मंडल ने बताया की बुधवार को पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारे का आयोजन होगा।

    Bottom Post Ad

    Trending News