उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट:धीरज यादव
दुबहर, बलिया:-- क्षेत्र के धरनीपुर गांव में नवनिर्मित श्री हनुमत एवं मां दुर्गा मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन मंगलवार की देर शाम श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। कथा के अंतिम दिन कथा वाचक आचार्य आनंद बिहारी शास्त्री ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र और उनके दिव्य विवाहों की आध्यात्मिक व्याख्या की। आचार्य ने बताया कि भगवान कृष्ण के 16,108 विवाहों का उद्देश्य सांसारिक भोग नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि 16,100 रानियां वास्तव में वेद के 'उपासना कांड' के मंत्र थे, जो स्त्री रूप में प्रकट हुए थे। रुक्मणी सहित आठों पटरानियां स्वयं लक्ष्मी, गंगा, तुलसी और पृथ्वी देवी जैसी शक्तियों की अवतार थीं। कथा के दौरान आचार्य ने जीवन का सार समझाते हुए कहा कि रूप, यौवन, संपत्ति और पद- ये चार चीजें यदि किसी व्यक्ति के पास हों और वह बुद्धि का प्रयोग न करे, तो अनर्थ निश्चित है। कृष्ण ने सिखाया कि इन चारों का उपयोग केवल विवेक और लोक कल्याण के लिए होना चाहिए।
आचार्य ने कलयुग के लक्षणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस युग में बलवान ही राज करेगा और वर्ण-आश्रम व्यवस्थाएं बाधित होंगी। ऐसे कठिन समय में 'हरि नाम' ही मुक्ति का एकमात्र सहारा है। आचार्य ने जोर देकर कहा कि भागवत महापुराण का मूल उद्देश्य जीव को परमात्मा से जोड़ना है। इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

TREND