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    मृत्यु का भय ही अधर्म से बचाता है : डॉ. ओंकार नारायण


    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट धीरज यादव 

    दुबहर, बलिया:--क्षेत्र के शिवपुर दियर नई बस्ती ब्यासी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीशतचंडी महायज्ञ 17 मई से 25 मई के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित कथा प्रवचन के दौरान मंगलवार की शाम नैमिषारण्य की पवित्र धरती से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित डॉ. ओंकार नारायण भारद्वाज ने अपने ज्ञानवर्धक और मर्मस्पर्शी विचारों से उपस्थित जनसमुदाय को निहाल कर दिया।
    कथा व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए डॉ. ओंकार नारायण भारद्वाज ने जीवन के एक कड़वे सत्य को उजागर किया। उन्होंने कहा कि "मनुष्य को जीवन भर सिर्फ जीने की तैयारी छोड़कर, हमेशा मरने की तैयारी करते रहना चाहिए। सारा जीवन भौतिक सुख-साधनों को बटोरते-बटोरते कब समाप्त हो जाता है, यह कोई नहीं जानता। अगर मनुष्य के मन में मृत्यु का भय और ईश्वर के प्रति जवाबदेही बनी रहे, तो वह कभी चाहकर भी कोई अधर्म या पाप कर्म नहीं कर सकता।" उन्होंने भौतिकवादी सोच पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आजकल लोग अधिक से अधिक धन-संपदा कमाने के लिए नाना प्रकार के उचित-अनुचित कर्म करते हैं। वे सोचते हैं कि वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि उनकी आने वाली सात पीढ़ियां बैठकर खा सकें। डॉ. ओंकार नारायण भारद्वाज ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। लोग अपनी सात पीढ़ियों के लिए धन नहीं, बल्कि उन्हें 'अपाहिज' बनाने का सामान इकट्ठा कर रहे हैं। मेहनत और सदाचार के बिना मिला धन आने वाली पीढ़ियों को आलसी और संस्कारहीन बनाता है।
    कथा के दौरान उन्होंने राजा परीक्षित को शुकदेव जी द्वारा सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा का अत्यंत विस्तारपूर्वक और रोचक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे मात्र सात दिनों में राजा परीक्षित ने मृत्यु के भय को जीतकर मोक्ष की प्राप्ति की। कथा को और अधिक दिव्य बनाने में डॉ. ओंकार नारायण भारद्वाज के साथ पधारे पूज्य करुणानिधान जी और उनकी समस्त संगीत मंडली ने अहम भूमिका निभाई। कथा के दौरान डॉ. ओंकार नारायण भारद्वाज जी ने अपनी भजन गीत- "मन की मलाल मार लो, बस हो गया भजन। आदत बुरी सुधार लो, बस हो गया भजन.. एवं "हरि की कथा सुनने वाले, प्रभु की गाथा गाने वाले, तुमको लाखों प्रणाम.. सुनाकर उपस्थित लोगों को भाव विभोर कर दिया।
    इस अवसर पर भगवान जी मिश्र, अवध तिवारी, गणेश जी सिंह, पिंटू जावेद, राजू मिश्रा, प्रधान धर्मेंद्र यादव, पूर्व प्रधान पिंटू मिश्र, केडी सिंह, सुजीत सिंह, संतोष मिश्रा, बसंत सिंह, पवन गुप्ता, मनोज गिरी, अजीत मिश्रा, परशुराम यादव, नंदकुमार चौबे, गिरीश तिवारी, बच्चन जी प्रसाद, रणजीत सिंह, बब्बन विद्यार्थी, अन्नपूर्णानंद तिवारी, राकेश राय, दिनेश तिवारी, जितेंद्र मिश्र, छवांगुर गिरी, धीरज गुप्ता सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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