उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट:धीरज यादव
दुबहर, बलिया:--आदर्श रामलीला कमेटी नगवा के मंच पर बुधवार की रात रामलीला के दौरान "नारद मोह" का मंचन किया गया। सबसे पहले पं0 जय गणेश चौबे "जयकांताचार्य" ने मंत्रोचार के बीच भूमि पूजन एवं भगवान विष्णु की आरती की। इसके बाद ग्राम प्रधान प्रतिनिधि भुवनेश्वर पासवान ने फीता काटकर रामलीला का शुभारंभ कराया।
लीला में नारद हिमालय की कंदरा में बैठकर तपस्या करने लगे। इसे देख इंद्र को भय हो गया कि नारद तपस्या के बल पर हमारा सिंहासन प्राप्त करना चाहते हैं। इंद्र अपने शखा कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने को भेजते हैं। तपस्या भंग नहीं हुई तो कामदेव हार मान गए। इस पर नारद को घमंड हो गया कि मैंने कामदेव को जीत लिया। यह बात ब्रह्मा और शंकर से जाकर बताएं। इधर भगवान विष्णु ने नारद के घमंड को जानकर माया का एक नगर बनाकर शील निधि राजा की पुत्री का स्वयंवर करते हैं।
नारद कन्या के हाथ को देखकर मोहित हो जाते हैं। नारद ने विष्णु से प्रार्थना कर सुंदर रूप की मांग करते हैं। इस पर भगवान विष्णु ने उन्हें बंदर का रूप दे दिया। जब नारद को पता चला कि विष्णु ने बंदर का रूप दिया है, तो नारद क्रोधित होकर विष्णु को श्राप दे देते हैं।
सिद्धार्थ पाठक विष्णु, वीरेंद्र नाथ चौबे नारद, रवि पाठक शंकर, दिव्यांशु इंद्र, अंकुश राजा विश्व मोहिनी तथा मनोज ने कामदेव की भूमिका निभाई। रामलीला को सफल बनाने में अध्यक्ष बरमेश्वर पाठक, मंत्री हरेराम पाठक 'लालू', कोषाध्यक्ष अनिल पाठक, राज नारायण पाठक, जगेश्वर मितवा, हरेराम पाठक ब्यास, गिरधर पाठक, सुनील पाठक, बिनोद पाठक, टुन्नू पाठक, मोहन पाठक आदि मौजूद रहे।

TREND