उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट:धीरज यादव
दुबहर, बलिया:-- आदर्श रामलीला कमेटी के रंगमंच पर आजीवन दशानन रावण का अविस्मरणीय किरदार निभाकर जनमानस में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले प्रख्यात मानस मर्मज्ञ, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक, कवि एवं पूर्व प्रधानाध्यापक पंडित शिवजी पाठक का बुधवार की रात निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर से शिक्षा, साहित्य और धार्मिक-सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
पंडित शिवजी पाठक केवल एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि साहित्य और रामलीला की समृद्ध परंपरा के सशक्त संवाहक थे। रामलीला के मंच पर दशानन रावण के रूप में उनका ओजस्वी अभिनय दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता था। अपने प्रभावशाली संवाद, दमदार आवाज और अभिनय कला के माध्यम से उन्होंने रावण के चरित्र को ऐसी जीवंतता प्रदान की कि उनकी पहचान लंबे समय तक लोगों के स्मृति पटल पर अंकित रहेगी। वे मानस के गहन अध्येता, ओजस्वी कवि तथा पूज्य त्रिदण्डी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका निधन एक ऐसे व्यक्तित्व का अवसान है, जिसने शिक्षा, साहित्य, अध्यात्म और लोकसंस्कृति के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का तांता लग गया। क्षेत्र के शिक्षाविदों, साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, रामलीला प्रेमियों और शुभचिंतकों ने पहुंचकर उनके प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उनकी अंत्येष्टि गुरुवार को शिवरामपुर घाट पर की गई। मुखाग्नि उनके ज्येष्ठ पुत्र इंजीनियर भगवती शरण पाठक ने दी।
पंडित शिवजी पाठक का जाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि उस पीढ़ी का एक अनमोल व्यक्तित्व खो देना है, जिसने अपनी प्रतिभा, ज्ञान और साधना से समाज को समृद्ध किया। रामलीला के मंच पर रावण के रूप में उनकी गूंजती आवाज और उनके व्यक्तित्व की स्मृतियां सदैव लोगों के हृदय में जीवित रहेंगी।

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