Type Here to Get Search Results !

custum trend menu

Stories

    29 मार्च 2025 को बन रहा है पिशाच योग, जो किसी के लिए लाभकारी तो किसी के लिए अत्यंत कष्टकारी है : आशीष कुमार तिवारी




    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट: हिमांशु शेखर 
    बलिया उत्तरप्रदेश:---ज्योतिष गणना के अनुसार साल 2025 का सबसे बड़ा राशि परिवर्तन 29 मार्च को होगा, गौरतलब है कि, शनि सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है, शनिदेव एक राशि में करीब ढाई साल रहते हैं, ऐसे में एक राशि चक्र पूरा करने में करीब 30 साल का वक्त लग जाता है।

     29 मार्च को शनि देव कुंभ राशि से मीन राशि में गोचर करेंगे, शनि के मीन राशि में गोचर करने से मीन राशि में ही राहु और शनि की युति बन रही है, यानी की मीन राशि में पहले से राहु विराजमान है इस तरह से शनि राहु की युति से बन रही है।

    साथ ही इस बार साल का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को लगेगा, सूर्य ग्रहण की शुरुआत 29 मार्च को दोपहर 02 बजकर 20 मिनट पर होगी, वहीं इसका समापन शाम 06 बजकर 16 मिनट पर होगा, ऐसी स्थिति में कुछ राशि के जातकों को सावधान रहने की जरूरत है।

    कब होगा शनि का गोचर?

     वैदिक ज्योतिष गणना के अनुसार 29 मार्च को रात 11.01 मिनट पर शनि मीन राशि में गोचर करेंगे और 3 जून 2027 तक यहीं विराजमान रहेंगे, जहां पहले से राहु विराजमान है, ऐसी स्थिति में शनि और राहु की युति मीन राशि में बनेगी, जिससे अशुभ योग का निर्माण होगा और यह युति भी 18 मई तक रहेगी।

    जिसका प्रभाव कुछ राशि के जातकों पर पर नकारात्मक तौर पर देखने को मिलेगा, जिसमें मेष, कुंभ ,सिंह और धनु राशि के जातक शामिल है, वहीं मेष, कुंभ और मीन राशि के जातकों पर साढ़ेसाती शुरू का प्रभाव शुरू होगा, वहीं सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या शुरू होगी.


    इन राशियों पर चढ़ेगी साढ़ेसाती:--

    ज्योतिषाचार्य नवरत्न वत्स के अनुसार राहु की युति से मेष, सिंह , धनु और कुंभ राशि के जातकों को धन संबंधित परेशानियों में इजाफा होगा, मानसिक परेशानियां रहेगी, सेहत को लेकर भी दिक्कत आ सकती है, साथ ही बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं, 18 मई तक इन जातकों को सावधान रहने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ 29 मार्च को शनि की राशि परिवर्तन करते ही कुंभ राशि और मीन राशि पर शनि देव की साढ़ेसाती का प्रभाव भी अगले ढाई वर्षो तक रहेगा तो, सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या भी शुरू होगी।

    पिशाच योग का प्रभाव :---

    शनि-राहु या शनि-केतु की युति जिस भी भाव में होती है, यह उस भाव के फल को बिगाड़ देती है या नष्ट कर देती है।
    ऐसे में व्यक्ति को हर कदम पर संघर्ष करना होता है और उसके जीवन में अचानक ही कोई घटना घट जाती है। 
    ऐसी घटना जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता या अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। 

    ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि ,इस योग के कारण एक के बाद एक कठिनाइयां सामने खड़ी होने लगती हैं।
    उम्र के 7 से 12 या 36 से लेकर 47 वर्ष तक का समय हो तो मुसीबतों का दौर थमता नहीं है। 

    ऐसा भी देखा गया है कि, इस उम्र के दौरान यदि किसी शुभ या योगकारी ग्रह की दशा काल हो और शनि+राहू की युति हो तो इस योग के कारण उक्त ग्रहों की दृष्टि का दुष्प्रभाव उस ग्रह पर हो जाने से शुभ फल नष्‍ट हो जाता है। 

    अधिकतर ज्योतिषाचार्य इसे पितृदोष नहीं मानते हैं, लेकिन यह माना जाता है कि, यह पूर्व जन्म के दोषों में से शनि ग्रह से निर्मित पितृदोष है। 

    कहते हैं कि, इससे जमीन-जायदाद संबंधी विवाद भी पैदा होते हैं, प्रॉपर्टी बिक जाती है, कारखाना या दुकान हो तो बंद हो जाते हैं, पिता पर कर्ज इतना चढ़ जाता है कि उसे चुकाना मुश्किल हो जाता है। नौकरी हो तो छुट जाती है।

    यह भी कहा जाता है कि, ऐसे योग के कारण या ऐसे योग वाले के घर में जगह-जगह दरारें पड़ जाती हैं, सफाई के बावजूद बदबू आती रहती है। घर में से जहरीले जीव-जंतु निकलना भी इसकी निशानी है। मतलब यह कि इस घर में प्रेत योग का असर हो रहा है, यदि यह युति सप्तम भाव पर प्रभाव डाले तो विवाह टूट जाता है। 

    अष्टम पर डाले तो जातक पर जादू-टोने जैसा अजीब-सा प्रभाव रहता रहता है और हो सकता है कि, उसकी दर्दनाक मौत हो जाए, नवम भाव में हो तो भाग्य साथ छोड़ देता है, एकादश भाव में हो तो मुसीबतों से लड़ते-लड़ते इंसान हारकर बैठ जाता है। 

    ज्योतिष के मुताबिक, शनि देव की वजह से मृत्यु तुल्य कष्ट देने वाली कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।

    शारीरिक कमज़ोरी, पेट दर्द, टीबी, कैंसर, त्वचा रोग, फ्रैक्चर, लकवा, सर्दी-ज़ुकाम, अस्थमा, चर्म रोग।

    शनि देव के प्रभाव से होने वाली कुछ और समस्याएं:--

    पैरों के असाध्य रोग, मलाशय और आंतों के रोग
    मनोभ्रंश, अंग खराब होना, पैर लड़खड़ाना, बाल झड़ना
    आंख खराब होना, कान में दर्द, लंगड़ापन अंग भंग हो जाना आदि।

    शनि दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में कई समस्याएं आने लगती हैं।

     शनि दोष के कुछ संकेत ये हैं:---काम में अड़चने आना, कर्ज़ का बोझ होना, घर में आग लगना, मकान बिकना, घर में लड़ाई-झगड़े के कारण परिवार में फूट पड़ जाना।

    अशुभ राहु के कारण कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं:--

    पेट और आंतों की समस्याएं, अल्सर और गैस्ट्रिक, त्वचा की समस्याएं, जोड़ों में दर्द, पथरी की समस्या, दिल की बीमारी, बवासीर, त्वचा संबंधित बीमारियां, कुष्ट रोग आदि।

    राहु से जुड़ी कुछ और समस्याएं:--

    मानसिक तनाव और डिप्रेशन, याददाश्त कम होना, गुस्से पर नियंत्रण न रहना, अज्ञात भय की स्थिति
    आर्थिक नुकसान, नौकरी और कारोबार में बाधा, परीक्षा में असफलता, कार्य में मन न लगना, बेबुनियाद ख्यालों में उलझना, अचानक धन का खर्च होना, आमदनी से ज्यादा खर्चा।

    इसी तरह कुंडली के हर भाव में इसका प्रभाव अलग-अलग होता है।

    Bottom Post Ad

    Trending News