उत्तर प्रदेश लखनऊ
इनपुट: रमाशंकर गुप्ता
लखनऊ: ---भारतीय जनता पार्टी के नेता सत्यदेव त्रिपाठी का रविवार को हार्ट अटैक से निधन हो गया. कांग्रेस पार्टी की उत्तर प्रदेश में सरकार रहने के दौरान सत्यदेव त्रिपाठी मंत्री भी रहे थे. उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के करीबियों में गिना जाता था.साल 2019 में कांग्रेस ने जब उत्तर प्रदेश के प्रभारी के रूप में प्रियंका गांधी को भेजा और अध्यक्ष के रूप में अजय कुमार लल्लू को बिठाया तो विरोध शुरू हो गया. इसके बाद अनुशासनहीनता के आरोप में नवंबर 2019 में सत्यदेव त्रिपाठी समेत 10 वरिष्ठ कांग्रेसियों को निष्कासित कर दिया गया था.
इसके बाद साल 2021 में सत्यदेव त्रिपाठी ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. सत्यदेव त्रिपाठी इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ की राजनीति से जुड़े रहे थे. वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष भी रह चुके थे. उत्तर प्रदेश सरकार में गृह एवं सूचना मंत्री भी रह चुके थे.
पुराने कांग्रेसी नेताओं में सत्यदेव त्रिपाठी का नाम शुमार था, लेकिन दशकों तक कांग्रेस में रहने के बाद साल 2019 में अनुशासनहीनता के आरोप में उनको जब पार्टी से बाहर निकाल दिया गया तो कांग्रेस में ही इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं.
साल 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 15 दिसंबर 2021 को कांग्रेस से निष्कासित पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी ने अपने बेटे अभिषेक त्रिपाठी के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के नेता थे.
कांग्रेस से निकाले जाने के बाद उन्होंने प्रियंका गांधी पर जमकर निशाना साधा था. कांग्रेस महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी जब अपना चार दिन का दौरा बीच में छोड़कर दिल्ली लौट गई थीं तो सत्यदेव त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की थी. इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया था.
उन्होंने लिखा था कि अमेठी के प्रभारी बनकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने जो परिणाम राहुल गांधी को दिया था, उसकी पुनरावृत्ति 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सुनिश्चित करने में जुटी हैं. बता दें कि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी प्रभारी थीं और राहुल गांधी अमेठी से भाजपा की उम्मीदवार स्मृति ईरानी से हार गए थे. सत्यदेव त्रिपाठी के लगातार बगावती सुरों के चलते ही उन्हें कांग्रेस पार्टी थे बाहर किया गया था।

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