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    मधुमालती के पौधे की देखभाल कैसे करें : Santosh Kumar gupta

    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट: अमीत कुमार गुप्ता 


    बलिया उत्तरप्रदेश:---मधुमालती (Rangoon Creeper) एक सदाबहार बेल वाला पौधा हैं, इसकी ग्रोथ काफी तेजी से होती हैं, इसमें लाल और सफेद रंग के सुगंधित फूल खिलते हैं। इसके आकर्षक फूल मधुमक्खियों, पक्षियों और तितलियों को आकर्षित करते हैं। इसकी कटिंग बसंत और बरसात के मौसम में बहुत आसानी से लगा सकते हैं।

    ■ ️️मधुमालती के पौधे की देखभाल कैसे करें :-

    मिट्टी :- मधुमालती के पौधे को लगाने के लिए ऐसी मिट्टी का इस्तेमाल करें जो भुरभुरी हो और अच्छी जल निकासी वाली भी हो। इसके लिए 50% मिट्टी, 30% वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद और 20% रेत या कोकोपीट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    गमले का चयन :- मधुमालती को जमीन और गमले दोनों में लगा सकते हैं। इसे गमले में लगाने के लिए कम से कम 12 इंच के गमले का चुनाव करें, जिसके नीचे जल निकासी के लिए छेद हो।

    सूरज की रोशनी :- मधुमालती के पौधे को कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप की आवश्यकता होती हैं। पर्याप्त सूरज की रोशनी मिलने पर पौधा हेल्दी रहता हैं और अच्छे से ग्रोथ करता हैं।

    पानी :- पौधे को ठीक से खिलने के लिए नियमित रूप से पानी देने की आवश्यकता होती हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने गमले में जरूरत से ज्यादा पानी डालें। गर्मियों में दिन में एक बार पानी देना अच्छा रहता हैं और सर्दियों में आप हर 3 दिन या हफ्ते में एक बार पानी दे सकते हैं। यह मिट्टी के सूखने पर निर्भर करता हैं।

    खाद :- महीने में एक बार एक-दो मुट्ठी वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद डालिए। अधिक फूल खिलाने के लिए अपने पौधे में नाइट्रोजन युक्त खाद डालने से बचें। आप अपने पौधों को महीने में एक बार डीएपी के 4-5 दाने डाल सकते हैं अथवा महीने में एक बार NPK 05:10:10 या NPK 00:52:34 भी डाल सकते हैं। इसके अलावा आप केले या प्याज के छिलके का लिक्विड फर्टिलाइजर का उपयोग कर सकते हैं।

    डेड-हैडिंग :- मधुमालती के फूल गुच्छों में खिलते हैं। जब इसके फूल खिलकर सूख जाए तो उसकी टिप्स को काटकर हटा दें, इससे पौधा घना बनता हैं और नई-नई कलियाँ आती हैं।

    कीट :- इस पौधे में स्लग और एफिड्स कीट लगने का खतरा रहता हैं। पौधे में कीट लगने पर आप नीम ऑयल का छिड़काव कर सकते हैं। 3-4 ml नीम ऑयल को 1 लीटर पानी में घोलकर उसमें 1 ml लिक्विड डिटर्जेंट मिलाकर, घोल बनाएं और पौधे के प्रत्येक भाग पर अच्छे से स्प्रे करें।


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