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    Gyan:शुक्राचार्य और बृहस्पति को भस्म करने के लिए शिव जी ने अपना तीसरा नेत्र खोला



    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट: हिमांशु शेखर 
    बलिया उत्तरप्रदेश:---ब्रह्मा जी के मना करने के पश्चात शुक्राचार्य और बृहस्पति नारद मुनि के साथ कैलाश पर्वत पर भोलेनाथ शिव जी के पास पहुँचते है। शिव जी को ध्यान में मग्न देख शुक्राचार्य और बृहस्पति भड़क जाते है और कहते है कि वे महादेव नहीं है क्योंकि उन्हें सृष्टि के विकास की कोई चिंता नहीं है। उनकी बातें सुनकर शिव जी को क्रोध आ जाता है और वे कहते है कि उन्होंने उनका अपमान किया है, अतः वह उन दोनों को संसार से अस्तित्व ही मिटा देंगे। शिव जी उन दोनों को भस्म करने के लिए अपना तीसरा नेत्र खोल देते है, उससे निकली अग्नि से शुक्राचार्य और बृहस्पति जलने लगते है। यह देख नारद मुनि शिव जी को समझाते है कि यह उनका अपमान नहीं था, बल्कि जान बूझ कर किया गया मर्यादा भंग था, आत्मसमर्पण था, क्योंकि उन्हें पता था कि यदि आप क्रोधित हो गए तो वे आपकी क्रोधाग्नि में भस्म हो जाएंगे। उन्होंने आपके त्रिगुणों को जानने के लिए यह साहस किया था। अतः सृष्टि के कल्याण के लिए अपने क्रोध पर अंकुश लगाकर इन्हें क्षमा करें। ब्रह्मा जी भी शिव जी से उन्हें भस्म नहीं करने का अनुरोध करते है। उनके अनुरोध पर शिव जी अपनी क्रोधाग्नि को वापस ले लेते है और कहते है कि शुक्राचार्य और बृहस्पति ने महान अग्नि परीक्षा दी है, इसलिए अब वे पहले से अधिक तेजस्वी हो गए है। शुक्राचार्य और बृहस्पति के क्षमा माँगने पर वे कहते है कि वे त्रिगुणातीत नहीं है, क्योंकि क्रोध उनका स्वभाव है। त्रिगुणातीत तो केवल क्षीर सागर निवासी भगवान विष्णु है, सागर लक्ष्मी का निर्माण उन्हीं के लिए किया गया है। जब शुक्राचार्य शिव जी से पूछते है कि क्या उन्हें उनकी भी परीक्षा लेनी होगी? शिव जी कहते है कि जिसकी माया के सभी आधीन है, उनकी परीक्षा कोई कैसे ले सकता है? ऐसा समझिए प्रभु आप सभी की परीक्षा ले रहे है।

    रामायण और जय श्री कृष्णा धारावाहिक को मिले अपार प्रेम के पश्चात रामानंद सागर जी ने धार्मिक धारावाहिकों की अगली श्रृंखला के रूप में जय महालक्ष्मी धारावाहिक का निर्माण करके महर्षि मार्कण्डेय द्वारा जन कल्याण के लिए सुनाई गई माता महालक्ष्मी की दिव्य कथा को जन मानस के सामने प्रस्तुत किया है। भगवान विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी जिन्हें धन, सम्पदा और समृद्धि की देवी माना जाता है और उनकी अनुकम्पा से ही मनुष्य का जीवन का संचालन सुचारू रूप से चलता है। “तिलक” चैनल “दिव्य कथाएं” के इस संकलन के माध्यम से माता महा लक्ष्मी से जुड़े कुछ अमूल्य प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा है, जिसके अवलोकन/श्रवण करने से आप पर माँ लक्ष्मी की कृपा बरसेगी। अतः भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।

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