नेपाल काठमांडू
इनपुट:सोशल मीडिया
नेपाल काठमांडू:---73 वर्षीय सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनी हैं उन्हें जेन-जी समूह की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने नियुक्त किया जिसने हाल ही में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के जरिए केपी शर्मा ओली सरकार को सत्ता से हटाया था।
ओली किस कदर चीन का गुलाम बन गया था सोचिए ओली और प्रचंड दोनों चीन के दलाल थें।
ओली नेपाल के लोगो को भारत विरोधी चूरन बेच रहा था की 1810 में भारत ने हमारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है चीनी दूतावास के पैसे से वहां पर इतनी ज्यादा भारत विरोधी मीडिया और भारत विरोधी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर खड़े कर दिए गए कि उन्होंने पूरे नेपाल में भारत को एक खलनायक की तरह पेश किया जैसे भारत नेपाल पर कब्जा करता चला जा रहा है।
जबकि सुगौली की संधि में जो अंग्रेजों और नेपाल के बीच हुई थी उसमें भारत ने जितनी अंग्रेजों ने जितनी जमीन नेपाल से लिया था उसे 20 गुना ज्यादा पूर्वी तराई नेपाल को दे दिया था।
ओली जैसे दलाल के दम पर चीन धीरे-धीरे नेपाल के जमीन पर कब्जा कर रहा था लेकिन नेपाल की मीडिया नेपाल की सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर चीन के पैसे के दम पर इस पर चुप थें।
चीन ने नेपाल में हिमुय्या षंखुवाश्भा, हुमिया, सिंधुपालचोक और रसुवा की भूमि पर कब्जा कर लिया है और पूरे ग्राम रुई पर भी कब्जा कर लिया।
चीन की सड़क परियोजनाओं ने नेपाल में नदियों की दिशाएं बदल दीं हैं जिसके द्वारा चीन ने नेपाल की भूमि पर सरलता से कब्जा करना शुरू किया और देखते ही देखते कई क्षेत्रों का बड़ा भू भाग अपने कब्जे में कर लिये।
यह सारी बातें 2020 नेपाल सरकार की ही एक रिपोर्ट से खुलकर सामने आई हैं जिस रिपोर्ट को अभीतक दबाकर जनता व विपक्ष की दृष्टि से छिपकाकर रखा गया था।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कई जिलों में नेपाली क्षेत्र को चीन द्वारा कब्जा कर लिया गया है और साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि थी कि इसी प्रकार उत्तर दिशा में चीन द्वारा नदियों की दिशाओं में परिवर्तन किया जाता रहा तो चीन नेपाल के और भी कई क्षेत्रों को अपने कब्जे में ले सकता हैं।
लेकिन तब ओली ने जिस सरकारी अधिकारी ने सर्वे करके यह रिपोर्ट सरकार को भेजा था चीन के दबाव में उसे ही सस्पेंड कर दिया था।
लेकिन जब उन इलाके के लोगों ने अपनी सच्चाई बताई कि अब हम खेती करने नहीं जा रहे क्योंकि चीन के सैनिक हमको रोक रहे हैं तब जाकर जो औली अब तक नेपाल के युवाओं का प्रिय था वह धीरे-धीरे नेपाल के युवाओं का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया।
लेकिन एक भारत है जहां इटली और ब्रिटेन के बराबर की जमीन चीन को देने वाले को हम भारत रत्न दे देते हैं।
इस पूरे डेवलपमेंट के अर्थ का विश्लेषण करें तो नेपाल की वामपंथी ओली सरकार ने भारत के क्षेत्रों पर अवैध दावा इसलिए किया जिससे कि वह जनता का ध्यान भटका कर उनकी भावनाएं भारत विरोध में भड़काकर चीन द्वारा निरंतर किए जा रहे नेपाल की भूमि पर अवैध कब्जे के विषय को छिपाया जा सके ।

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