उत्तर प्रदेश बलिया
इनपुट धीरज यादव
दुबहर, बलिया:--क्षेत्र के शिवपुर दियर नई बस्ती बयासी अखार ढाला स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् रामकथा ज्ञानयज्ञ का मंगलवार की देर शाम को भव्य समापन हुआ। 7 जनवरी से 13 जनवरी तक चली इस कथा के अंतिम दिन अयोध्या से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक संत पंडित अरविंद तिवारी ने व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को भक्ति और मर्यादा का मार्ग दिखाया।
कथा के अंतिम दिन पंडित अरविंद तिवारी ने कहा कि मनुष्य को जीवन में भूलकर भी किसी सज्जन व्यक्ति या संत का अपमान नहीं करना चाहिए।उन्होंने चेताया कि संतों का अपमान करने वाले को इसका फल तत्काल भुगतना पड़ता है। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा, "जब व्यक्ति के पास प्रभुता या संपन्नता आती है, तो उसे धर्म और मर्यादा में रहना चाहिए। अहंकार के कारण ही रावण के विशाल कुल (एक लाख पुत्र और सवा लाख नाती) का विनाश हो गया और कोई शेष नहीं बचा ।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने विचारों की शुद्धता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन उसके विचारों पर टिका है; जैसा व्यक्ति सोचता है, उसका आचरण भी वैसा ही होता जाता है। कथा के दौरान जब उन्होंने भावपूर्ण भजन "उनकी करुणा में कोई कमी है नहीं, पात्रता में हमारी कमी रह गई" सुनाया, तो पंडाल में उपस्थित भक्तगण भावविभोर होकर झूम उठे। कथा के अंतिम पड़ाव पर व्यास पीठ से भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और माता सीता संग उनके राज्याभिषेक का सजीव व विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। भगवान के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
इस धार्मिक अनुष्ठान के समापन अवसर पर मुख्य रूप से श्रीकांत सिंह, उदय नारायण सिंह, डॉ. जेपी सिंह, डॉ. रचना सिंह, केडी सिंह, शिक्षक त्रिभुवन यादव, ध्रुव नारायण, मंजीत सिंह, संतोष मिश्रा, कमला सिंह, वशिष्ठ मिश्रा, लालमणि सिंह, हीरालाल गुप्ता, वीरेंद्र नाथ चौबे एवं अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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