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    अंतिम समय में या मृत्यु के बाद मुंह में तुलसी और गंगाजल क्यों रखा जाता है?

     

    उत्तर प्रदेश बलिया 
    इनपुट: हिमांशु शेखर 

    बलिया उत्तरप्रदेश:--हिंदू धर्म में मृत्यु के समय या बाद में मुंह में तुलसी दल और गंगाजल डालने की परंपरा है, यह आत्मा को मोक्ष और विष्णु लोक की प्राप्ति कराती है।

    👉 गंगाजल सभी पापों को धो देता है, अंतिम समय मुंह में डालने से जीवन भर के पाप नष्ट हो जाते हैं, भगवान विष्णु के चरणों से निकला यह जल मोक्ष मार्ग खोलता है।

    👉 तुलसी भगवान विष्णु को सबसे प्रिय है, मृत्यु के समय तुलसी दल मुंह में रखने से आत्मा सीधे वैकुण्ठ पहुंचती है, गरुड़ पुराण में इसका स्पष्ट उल्लेख है।

    👉 तुलसी और गंगाजल से यमदूत दूर भागते हैं, मान्यता है कि ऐसा करने से आत्मा को नरक या यातना नहीं भोगनी पड़ती है, विष्णु दूत आकर आत्मा को वैकुण्ठ ले जाते हैं।

    👉 जब व्यक्ति अंतिम सांस ले रहा हो, तुरंत तुलसी दल और गंगाजल मुंह में डालें, इससे प्राण शांतिपूर्वक निकलते हैं, आत्मा को कष्ट नहीं होता है। मृत्यु हो जाए तब भी मुंह में तुलसी और गंगाजल डाला जाता है, इससे आत्मा को विष्णु लोक की गारंटी मिलती है, यह अंतिम संस्कार का अनिवार्य हिस्सा है।

    👉 गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं, जो मेरे नाम का स्मरण कर प्राण त्यागे, वह मेरे पास आता है, तुलसी-गंगाजल से विष्णु स्मरण अपने आप होता है।

    👉 तुलसी-गंगाजल डालने से पितृ दोष नहीं लगता है, आने वाली 14 पीढ़ियों को पुण्य मिलता है, कुल में सुख-शांति बनी रहती है।

    👉 तुलसी-गंगाजल डालते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'राधे-राधे' बोलें, इससे आत्मा को हरि नाम का बल मिलता है, मोक्ष निश्चित हो जाता है।


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